कल @VVCFilms की #shikara देखी... क्या जमीलतरीं फ़िल्म है जिसका गोशा गोशा अपनी प्यारी सरजमीं की मुहब्बत से मुअत्तर है.. सिर्फ़ कश्मीरी पंडितों की नहीं, हर खानाबदोश की अभिव्यक्ति है यह फ़िल्म..
फ़िल्म की रिलीज़ पर एक बड़ा वर्ग ऐसा था, जो चाहता था कि इसमें (1/n)
इस्लाम का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए था। यहाँ दो बातें हैं- पहली यह कि यदि यह फ़िल्म वापस लोगों को community की बुनियाद पर demonize करने लगती, तो अपने मकसद को पाने में विफल होती। इस फ़िल्म का उद्देश्य दरारों को बढ़ाना नहीं बल्कि पाटना है, यह दिखाना है कि जो कुछ (2/n)
हुआ 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ वो कितना अन्यायपूर्ण था, और साथ ही यह भी बताना था की ऐसा किसी के साथ नहीं होना चाहिए, न कि बदले के लिए उकसाना इसका मक़सद था। दूसरी बात, किसी भी घटना को लेकर हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया भिन्न भिन्न होती है, 19 जनवरी 1990 की रात (3/n)
जो कुछ हुआ, उसको लेकर भी सभी कश्मीरी पंडितों की प्रतिक्रिया भिन्न भिन्न है। एक अन्याय जो हुआ था, उसके प्रति सबकी प्रतिक्रिया केवल बदले या हिंसा की नहीं हो सकती.. दुख की, वेदना की भी हो सकती है। ये विधु विनोद चोपड़ा की प्रतिक्रिया है, और उनके जैसे बहुत से कश्मीरी (4/n)
पंडितों की भी जो ये जानते हैं कि घर से बिछड़ना क्या होता है, उस चौखट को जिससे निकलते समय यह सोचा न था कि फिर इस दहलीज़ पर क़दम रखने का इंतजार इतना लंबा होगा, ये भी पता न होगा कि वापस दर्शन मयस्सर होंगे या नहीं। ये फ़िल्म उन सबकी आवाज़ है, और इस दुनिया के उन करोड़ों (5/n)
लोगों की भी जो ऐसी ही परिस्थितियों में हैं। लेकिन ये फ़िल्म उनकी आवाज बनने से साफ़ इनकार करती है जिनका अपना तो कुछ खोया नहीं लेकिन कश्मीर मामलों के स्वयम्भू एक्सपर्ट बने फिरते हैं। न ही ये पॉलिटिकल माइलेज लेने वालों को कोई चारा देती दिखती है।
आपमें से बहुतों ने देखी (6/n)
होगी, नहीं देखी तो ज़रूर देखिये.. दिमाग़ से पॉलिटिकल कचरा निकाल कर देखेंगे तो ज़रूर पसंद आएगी। मुझे तो लगता है कि Oscar के लिए भेजी जानी चाहिए। (7/7)
Share this Scrolly Tale with your friends.
A Scrolly Tale is a new way to read Twitter threads with a more visually immersive experience.
Discover more beautiful Scrolly Tales like this.
