तथागत आठ गुणों के कारण लोकविश्रूत कहलाते है I
1. तथागत लोगों पर अनुकंपा करते हुए बहुजनों के हित-सुख
और भले में लगे रहते है I
2. तथागत जो धम्म सिखाते है, वह अच्छी तरह आख्यात होता
है याने उसकी कोई लालबुझक्कडी पहेलियां नही होती I
वह सांदृष्टिक सत्य
1)
पर आधारित होता है I उसमें मिथ्थां कल्प-
नाओं का स्थान नहीं होता I वह अकालिक होता है, धारण
करने पर अभी यहीं फलदायी होता है I वह सबका होता है,
सबके लिये होता है I
3. तथागत जो शिक्षा देते है उस से स्पष्ट होता है कि क्या भला है
क्या बूरा है,
2)
क्या अकुशल, क्या कुशल, क्या करणीय है,क्या
अकरणीय,क्या निंदनीय है और क्या अनिंदनीय है I
4. तथागत अपने शिष्यों को निर्वाण तक पहुंचने का मार्ग बहूत
स्पष्ट रूपसे सिखाते है I
3)
5. तथागत सारे समाज में लोकप्रिय होते है, लोग उन्हें श्रद्धा-
पूर्वक भोजन परोसते है I उसे स्वाद के लिये नहीं बल्कि
स्वास्थ्य के लिये ग्रहण करते है I
6. तथागत के अनेक शैष्य और अशैष्य शिष्य उनकी सेवा में
4)
उपस्थित रहते है I
7. तथागत यथावादी तथाकारी यथाकारी तथावादी होते है I
उनकी कथनी और करनी में जरा भी अंतर नही होता I
8. तथागत विचिकित्साकों से यानी शंका-संदेहों से पुर्णतया मुक्त
5)
होते है, क्योंकि वे समस्त लौकिक और पारलौकिक तथा
लोकोत्तर सत्यों का अनुभूतीजन्य जाणकार होते है I मुक्त
अवस्थानक पहुंचने के लिये उन्हें और कुछ करना नहीं रह
जाता है I
💐 सब्बे सत्ता सुखी होन्तु !
6)
#Suresh_Tembhurne
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