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Aug 18, 2020, 6 tweets

अविद्या :

तथागत बुद्ध ने भिक्खूओं को संबोधित करते हुए कहा -

भिक्खूओं ! अविद्या अकुशल धम्म की पूर्वगामी है। वह निर्लज्जता तथा पाप करने में डरता नहीं है, उसके ठीक पीछे-पीछे जाता है ।

भिक्खूओं !
जो अविद्या ग्रसित मनुष्य होता है,उसकी मिथ्या दृष्टि होती है ।

1)

जो मिथ्या दृष्टिवाला है, वह मिथ्या संकल्पवाला होता है। जो मिथ्या संकल्पवाला होता है, वह मिथ्या वाणीवाला हो जाता है। जो मिथ्या वाणीवाला होता है, वह मिथ्या कर्मान्तवाला होता है। जो मिथ्या कर्मान्तवाला होता है, वह मिथ्या आजीविकावाला होता है । जो मिथ्या

2)

आजीविकावाला होता है , वह मिथ्या व्यायामवाला होता है, जो मिथ्या व्यायामवाला है, वह मिथ्या स्मृतिवाला होता है। जो मिथ्या स्मृतिवाला होता है, वह मिथ्या समाधिवाला होता है। जो मिथ्या समाधिवाला होता वह मिथ्या ज्ञानवाला होता है, जो मिथ्या ज्ञानवाला होता है,

3)

वह मिथ्या विमुक्ति वाला होता है ।

भिक्खूओं ! विद्या कुशल धम्म की पूर्वगामी है ।

जो सम्यक दृष्टिवाला होता है, वह संकल्पवाला होता है । जो संकल्पवाला होता है, वह सम्यक वाणीवाला होता है। जो सम्यक वाणीवाला होता है , वह सम्यक कर्मान्तवाला होता है।

4)

जो सम्यक कर्मान्तवाला होता है , वह सम्यक आजीविकावाला होता है। जो सम्यक आजीविकावाला होता है, वह सम्यक व्यायामवाला होता है। जो सम्यक व्यायामवाला होता है, वह सम्यक स्मृतिवाला होता है। जो सम्यक स्मृतिवाला होता है, वह सम्यक समाधिवाला होता है। जो सम्यक समाधिवाला होता है,

5)

वह ज्ञानवाला होता है। जो सम्यक ज्ञानवाला होता है, वह सम्यक विमुक्ति वाला होता है ।

भिक्खूओं ! विद्या कुशल धम्म की पूर्वगामी है।

(संदर्भ : अविज्जा सुत्त)

भवतु सब्ब मंगलं !
6).

#Suresh_Tembhurne

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