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Aug 26, 2020, 21 tweets

हर्यक वंश (544 ई. पू. से 412 ई. पू. तक),

इस वंश का सबसे प्रतापी राजा बिम्बिसार (544 ई. पू. से 493 ई. पू.) था। इस वंश ने गिरिव्रज को अपनी राजधानी बनाया। बिम्बिसार का उपनाम श्रेणिक था। हर्यक वंश कुल के लोग नागवंश की एक उपशाखा थे। इसने कौशल एवं वैशाली के राज परिवारों से
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वैवाहिक सम्बन्ध क़ायम किया। उसकी पहली पत्नी महाकोसला पसेनजीत की बहन थी, जिससे उसे काशी नगर का राजस्व प्राप्त हुआ। उसकी दूसरी पत्नी चेल्लना वैशाली के लिच्छवी प्रमुख चेटक की बहन थी। इसके
पश्चात् उसने मद्र देश (कुरु के समीप) की राजकुमारी क्षेमा के साथ अपना विवाह कर मद्रों का
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सहयोग और समर्थन प्राप्त किया। महाबग्ग में उसकी 500 पत्नियों का उल्लेख है। कुशल प्रशासन की आवश्यकता पर सर्वप्रथम बिम्बिसार ने ही ज़ोर दिया था। बौद्ध साहित्य में उसके कुछ पदाधिकारियों के नाम मिलते हैं। इनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं-

1. सब्बन्थक महामात्त (सर्वमहापात्र)- यह
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सामान्य प्रशासन का प्रमुख पदाधिकारी होता था।
2. बोहारिक महामात्त (व्यवहारिक महामात्र)-यह प्रधान न्यायिक अधिकारी अथवा न्यायाधीश होता था।
3. सेनानायक महामात्त-यह सेना का प्रधान अधिकारी होता था।

बिम्बिसार स्वयं शासन की समस्याओं में रुचि लेता था। महाबग्ग जातक में कहा गया
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है कि उसकी राजसभा में 80 हज़ार ग्रामों के प्रतिनिधि भाग लेते थे। जैन ग्रन्थ उसे अपने मत का पोषक मानते हैं। दीर्धनिकाय से पता चलता है कि बिम्बिसार ने चम्पा के प्रसिद्ध ब्राह्मण सोनदण्ड को वहाँ की पूरी आमदनी दान में दे दी थी। पुराणों के अनुसार बिम्बिसार ने क़रीब 32 वर्ष तक
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शासन किया। बिम्बिसार महात्मा बुद्ध का मित्र एवं संरक्षक था। विनयपिटक से ज्ञात होता है कि बुद्ध से मिलने के बाद उसने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया और
बेलुवन नामक उद्यान बुद्ध तथा संघ के निमित्त कर दिया था। अन्तिम समय में अजातशत्रु ने अपने
पिता बिम्बिसार की हत्या कर दी।
6)

बिम्बिसार ने राजगृह नामक नवीन नगर की स्थापना करवाई थी।
बिम्बिसार का अवन्ति से अच्छा सम्बन्ध था, क्योंकि जब अवन्ति के राजा प्रद्योत बीमार थे, तो बिम्बिसार ने अपने वैद्य जीवक को भेजा था। बिम्बिसार ने अंग और चम्पा को जीता और वहाँ पर
अपने पुत्र अजातशत्रु को उपराजा बनाया।
7)

बिम्बिसार की हत्या इसके पुत्र अजातशत्रु ने 493 ई.पू. कर मे कर दि और मगध का राजा बन गया अजातशत्रु का उपनाम कुणिक था इसने लगभग 32 साल तक शासन किया अजातशत्रु जैन धर्म का अनुयायी था अजातशत्रु कि हत्या उसके पुत्र उदायिन ने 461 ई.पू. मे कर दी हर्यक वंश का अन्तिम राजा उदायिन
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का पुत्र नागदशक था नागदशक के पुत्र शिशुनाग ने 412 ई.पू. मेबीउन्हे हटा के शिशुनाग वंश की स्थापना की।

1. मगध राज्य के उत्थान में कौन-कौन वंशों का योगदान रहा?— वृहदत वंश, हर्यक वंश, शिशुनाग वंश, नंद वंश, मौर्य वंश
2. मगध की पहली राजधानी कहाँ थी और किसने इसका निर्माण
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करवाया था?— राजगृह, बिम्बसार ने
3. बिम्बिसार का राजवैध कौन था?— जीवक
4. बिम्बिसार का वध किसने किया था?— पुत्र आजातशत्रु ने
5. बिम्बिसार कौन-सा धर्म अपनाया था?— बौद्ध धर्म
6. पितृहन्ता के नाम से इतिहास में कौन कुख्यात हैं?— आजातशत्रु
7. अजातशत्रु किस धर्म को मानता था?—
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जैन धर्म को
8. उदयन ने किस नगर की स्थापना की और अपनी राजधानी बनायी?— पाटलिपुत्र को

हर्यक वंश ( पहला वंश )

बिम्बिसार (544 ई0पू0 से 492 ई0पू0)

बिम्बिसार को सोनिया या श्रेणिक नाम से भी जाना जाता था । मत्स्य पुराण मे क्षेत्रोजस का नाम मिलता है। अनुश्रुतियों के अनुसार
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पिता हेमजीत से राजसिंहासन को हथियाया था। मगध को संगठित करने के लिए संधि और युद्ध की नीति अपनाई। इसने सबसे पहले गंगा नदी के महत्व को समझा और इसके किनारे नगरों के राजाओं से वैवाहिक सम्बन्धों के अन्तर्गत संधि की।

1 कोशल की राजकुमारी कोशला देवी के साथ विवाह किया जिसका राजस्व
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एक लाख प्रति वर्ष था।
2 वैषाली के चेटक की पुत्री चेल्लाना से विवाह किया।
3 मद्र देश की राजकुमारी खेमा के साथ विवाह किया।

महावग्ग में उसकी 500 रानियों का उल्लेख मिलता है । इसके अलावा इसने अन्य जनपदों को राजदूत भेजे । अवन्ति के राजा प्रद्योत के पास राजचिकित्सक जीवक को
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भेजा इसी नीति के अन्तर्गत गांधार का राजदूत प्रतिषाक्य इसकी सभा मे आया। सिंध क्षेत्र से भी दूत आये थे। मैत्री के साथ-2 विस्तार की नीति को अपनाया । पश्चिम की तरफ संधि करके पूर्व की तरफ बढ़ा। अंग पर अधिकार किया इस विजय का उल्लेख बिदुर पण्डित जातक कथा मे मिलता
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है। इसने मैत्री के
साथ-2 आंतरिक व्यवस्था मे सुधार किया यह पहला राजा था जिसने प्रशासन को समझा,मंत्रिवर्ग का निर्माण किया मंत्रियों से विचार-विमर्श किया। इसने प्रारंभिक नौकरशाही तथा कानून व्यवस्था का निर्माण किया। स़ड़कों के महत्व को समझा, भूमि की पैमाइश किया, शेरशाह की तरह
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पैदावार का मूल्यांकन किया। सैद्धान्तिक रूप से भूमि को राजा की संपत्ति बनाने प्रयास किया। भूमि पर राजस्व का 1/6 प्रतिशत कर लगाया। कुछ विद्धानों का मत है कि इसके पुत्र अजातशत्रु ने इसकी हत्या की थी ।

अजातशत्रु

आजदशत्रु चेल्लाना का पुत्र था । अजातशत्रु का नाम अषोक चन्द्र
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मिलता है। अनेक विद्धान इसे मगध का वास्तविक संस्थापक मानते थी। इसने प्रसेनजित- कोशल के राजा से युद्ध किया तथा हार गया। बाद मे वजीरा की शादी अजातशत्रु से हुई दहेज मे काशी प्रदेश मिला । इसके सम्राज्य में अंग, वैशाली, वाराणसी शामिल थे। इसके समय मे माना जाता थी कि महाषिलाकंटक
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तथा रथमूश क नामक हथियारों का प्रयोग प्रारम्भ हुआ। भरहुत शिलालेख पर बुद्ध तथा अजातशत्रु के भेंट का उल्लेख मिलता है । इसके समय मे महावीर और गौतम बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ।
इसके समय मे पहली बौद्ध संगीति हुई । संभवतः इसने राजगृह मे बुद्ध के अवषेषों का स्तूप बनवाया।
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इसके प्रयासों से निचले गंगा घाटी के व्यापार पर मगध का अधिकार हुआ।

उदयिन

बौद्ध साहित्य स्रोतों ने उदायी या उदयिन को अजातशत्रु का उत्तराधिकारी मानाहै । महावंश के अनुसार इसने पिता की हत्या कर गद्दी प्राप्त किया। परिषिष्टपर्वन मे कहा गया हैं की - इसने पाटलिपुत्र की
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स्थापना की और राजधानी बसाई। इसने अपनी राजधानी मे जैन चैत्य बनवाए
इसलिए कुछ विद्धानो के अनुसार यह जैन था।

Tricks-मगध साम्राज्य पर शासन करने वाले वंश क्रम से
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Trick- "हर शिव नमो सुकसा"

हर - हर्यक वंश
शिव - शिशुनाग वंश
न - नन्द वंश
मो - मोर्य वंश
सु - सुंग वंश
कं - कण्व वंश
सा - सातवाहन वंश
21).

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