साभार एक फेसबुक मित्र की कलम से
#सरकारी बनाम #निजीकरण। (विचारों का तारतम्य न खोजे, जो महसूस किया वैसा लिख रहा हूँ।)
भारत में व्यक्ति पूजा एवं उनका #महिमामंडन भी खूब होता है तथा साथ ही कुछ काले धब्बों को दिखाकर एक अच्छी-खासी #संस्था का #मानमर्दन भी खूब होता है
जैसाकि वर्तमान में सरकारी संस्थाओं के बारे में किया जा रहा है।
बहुसंख्यक अपने दुख से दुखी नहीं होता है अपितु दूसरों को सुखी देखकर ज्यादे दुखी होता है और जनता की इसी दुर्बलता भरी भावना का लाभ उठाते हुए सरकारें अपनी गलत नीतियों को enforce कराती हैं
क्योंकि बहुसंख्यक गलत होता हुआ देखते हुए भी सरकार के गलत नीतियों के समर्थन या मौन समर्थन में होता है।
नोटबंदी से अधिकतर इस बात से खुश थें कि हमारा क्या जायेगा?, जिसके पास है वही तो बर्बाद होगा।
#पेंशन बंद होने से बहुसंख्यक इस बात से खुश हैं कि कौन सी हमको मिल रही थी?
सरकारी कर्मचारियों की छटनी हो या #संविदा पर रखा जाये, हमें क्या करना ये तो हराम की खाते हैं(ऐसा वही कहते हैं जो खुद सरकारी नौकरी नहीं पा सके)। काले धब्बे हर जगह हैं और कुछ को वास्तव में कटु अनुभव हुए भी होंगे पर जिस दिलेरी से सरकारी अस्पतालों/स्कूलों को गाली देते हैं
वे ही बिना किसी विरोध के प्राइवेट अस्पतालों एवं स्कूलों में उनके मनमुताबिक अपना पेट काटकर जमीन जायदाद बेचकर वहाँ payment कर देते हैं।
इलाज AIIMS, PGI, BHU इत्यादि में चाहिए। पढ़ने के लिए KGMC, AFMC, IIT, Roorkee, IIM, Delhi Univ., BHU, Lucknow Univ. इत्यादि चाहिए
और गाली देंगे सरकारी को।
पहले के सारे #अधिकारी, विभिन्न संस्थाओं में कार्यरत लोग सरकारी #प्राइमरी एवं #माध्यमिक स्कूलों में पढ़कर कहाँ से कहाँ पहुँच गये? अब #प्राइवेट प्राइमरी एवं माध्यमिक स्कूलों की मोटी फीस तो तभी मिलेगी न जब सरकारी को बदनाम किया जायेगा एवं
बर्बाद घोषित किया जायेगा।
रिलायंस जिओ तभी आगे बढ़ेगा न जब BSNL बर्बाद होगा।
सरकारी नौकरी किसी को थाली में सजाकर नहीं मिल जाती। उसके लिए नाक रगड़ना पड़ता है। रात-दिन मेहनत करनी पड़ती है। अपने जीवन के स्वर्णिम वर्षों में से 5-7-10 साल रात-दिन पढ़कर न्योछावर करने होते हैं।
फिर यदि नौकरी लग गयी या मन मुताबिक career मिल गया तो अच्छी बात अन्यथा इतने वर्ष बर्बाद होने के बाद असफलता की पीड़ा उस भुक्तभोगी के अलावा और कौन महसूस कर सकता है?
बड़े आसानी से कह देते हैं कि सरकारी कामचोर, बेईमान, भ्रष्ट होते हैं। कुछ काले धब्बों को छोड़कर जरा घर से निकले और
निष्पक्ष भाव से देखें कि कितने कामचोर, बेईमान और भ्रष्ट हैं। प्राइवेट डाक्टर को 500-1000 रूपये की फीस देकर नंबर लगाकर दिखाते हैं। सरकारी में चले जाइये और देखिये कि एक डाक्टर कितने मरीजों को देखता है और उसकी salary कितनी है? प्रशासनिक अधिकारी, डाक्टर, बैंकर, सफाई कर्मचारी
इत्यादि अधिकांश बड़ी मेहनत और समर्पण से कार्य कर रहे हैं। यदि आपको बेईमान दिखायी दे रहे हैं तो उनके खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाते, उनको suspend क्यों नहीं कराते, सबको क्यों गाली देते हैं?
ये जो सरकारी कर्मचारी हैं वो आप ही के घरों से आये हैं और बहुत मेहनत करके नौकरी पाये हैं।
इनको क्यों नहीं हक है job security का, पेंशन का, सुकून का?
निस्संदेह सबको सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती, तो क्या आप सरकारी कर्मचारियों को गाली देना शुरू कर देंगे। निस्संदेह प्राइवेट में वो job security, salary नहीं मिल पा रही है, जिसकी वजह से सभी सरकारी नौकरी की आकांक्षा रखते हैं
तथा जब रिश्ता खोजने जाते हैं, तो सरकारी दामाद ही चाहिए।
अतः सरकारी जोकि बहुत मेहनत के बाद नौकरी पाते हैं (तिकड़मी, बेईमानों, विभिन्न समीकरणों एवं पैसे के बलबूते घुसने वालों को छोड़कर) को गाली देने के बजाय, उनकी job security (???), handsome salary (???) से जलने के बजाय
और उनको नौकरी से छंटनी करने और संविदा पर रखने पर खुश होने के बजाय, यदि कोई बेईमान है तो उसका विरोध करें और उनको दंडित कराये, बनिस्पत सबको गाली दें।
और हाँ अगर आंदोलन करना है तो प्राइवेट में भी वही job security और salary के लिए आंदोलन करें न कि सरकारी को गाली देने के लिए।
शिक्षा विभाग में जहाँ highly qualified लोग highest degree लेकर आते हैं और प्राइवेट में उनको 5-10-15-20 हजार में रखा जाता है, उसका विरोध करें न कि सरकारी के तंख्वाह से जलन एवं उनकी सुरक्षा (???) को छीनने का प्रयास करें। सभी जानते हैं जो गाली दे रहे हैं,
उनकी भी चाहत सरकारी नौकरी ही रही है पर दुर्भाग्यवश किन्हीं कारणों से उन्हें मिल नहीं पायी।
कृपया इस थ्रेड को अन्यथा न ले निष्पक्ष भाव से मूल्यांकन करें।
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