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14 Sep, 22 tweets, 7 min read
इजराइल और यूएई की ऐतिहासिक डील होने के महीने भर के भीतर ही अब बहरीन ने भी दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है। बहुत संभव है कि सूडान और ओमान भी जल्द ही इस राह पर आगे बढ़े।

मिडिल ईस्ट में स्थापित हो रहे नए संबंधों का प्रभाव क्या सिर्फ खाड़ी तक ही सीमित रहेगा या हम भी प्रभावित होंगे?
अब तक कट्टर दुश्मन रहे इजराइल के प्रति खाड़ी देशों के लचीली होती सोच की भनक तब लगी थी जब सऊदी ने इजराइल के तेल अवीव जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट्स को अपने एयर स्पेस के इस्तेमाल की छूट दी थी। 2018 में हुई इस घटना की अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहुत चर्चा रही थी।
इन संकेतों को पकड़ते हुए डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जारेड कुशनर, जोकि ट्रम्प के मिडिल ईस्ट सलाहकार भी है, ने बैकडोर में सऊदी अरब के साथ मिल कर इजराइल से दोस्ती की कवायद शुरू की जोकि यूएई और बहरीन के रूप में फलित हुई।

आइये एक बार देखते हैं कि आखिरकार डील है क्या!
नीचे के मैप में देखिए पीले रंग में इजराइल है। गाज़ा और वेस्ट बैंक की जो दो बाउंड्रीज दिख रही हैं इजराइल के अंदर वो मिलकर फ़िलिस्तीन का निर्माण करती हैं (हालांकि यह पूरा इलाका इजराइल के कब्जे में है)।इजराइल लगातार इन दोनों स्थानों में से थोड़ी थोड़ी जमीन का अधिग्रहण करता रहता है।
यूएई से इस डील के बाद इजराइल ने इन इलाकों में और अधिग्रहण करना रोक दिया है। जो काम अरब मुल्क इजराइल से ताकत से कभी नही कर पाएं वो काम इस डील से हो गया

इजराइल को यह मिला कि उसके पड़ोस में उसके दुश्मनों की संख्या कम हुई। अरब देशों द्वारा इजराइल के आस्तित्व स्वीकारना ही बड़ी बात है
दुनिया के 57 मुस्लिम मुल्कों के लिए फिलिस्तीन का मुद्दा एक ऐसे गोंद का काम करता है जिससे सब आपस में जुड़े रहते हैं। दुनिया भर के मुसलमान आँसू बहाते हैं।
तो जैसा कि अरब मुल्कों ने दिखाया कि इस डील से फिलिस्तीन की मदद होगी, उस हिसाब से तो सभी मुस्लिम मुल्कों को खुश होना चाहिए?
लेकिन सब खुश नहीं है, और कुछ तो बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। और इसका कारण है कि एक दूसरा गोंद जो इन सब को बांध के रखता है उसने गोंद का काम करना बंद कर दिया है।

वह दूसरा गोंद है कश्मीर!

इस्लामिक देशों की संस्था OIC में इजराइल मुद्दे पर पड़ी फूट को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा
2014 में जब मोदी सत्ता में आए तब से उन्होंने इजराइल और अरब दोनों से मधुर संबंध बना कर दुनिया को चौंका दिया।

खाड़ी देशों द्वारा पीएम मोदी को दिए हुए सर्वोच्च नागरिक सम्मान देखिए

अप्रैल 2016 - सऊदी
फरवरी 2018 - फ़िलिस्तीन
अगस्त 2019 - यूएई
अगस्त 2019 - बहरीन
आप सोच सकते हैं कि मैं आपको अवार्ड क्यों गिना रहा हूँ लेकिन फिर मैं कहूँगा की आखिरी दो अवार्ड कौन से महीने में मिले हैं उसपे गौर करें।

यह दोनों अवार्ड अगस्त के उस महीने में मिले हैं जब भारत ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाई थी और पाकिस्तान सारे मुस्लिम देशों से समर्थन मांग रहा था
धारा 370 हटाने के मुद्दे पर पाकिस्तान के लगातार रोने के बावजूद ना ही अरब मुल्कों ने भारत के खिलाफ बयान दिया और ना ही इस मुद्दे पर OIC की मीटिंग रखी।

सिर्फ कुछ ही मुसलमान देशों ने भारत का विरोध किया वो हैं तुर्की, मलेशिया और दबे शब्दों मे ईरान।

कश्मीरी गोंद का असर कम होने लगा।
दिसंबर 2019

खीज कर पाक ने तुर्की के साथ मिल मलेशिया में OIC के विकल्प के तौर पर एक नया इस्लामिक संगठन बनाने की कवायद शुरू की। लेकिन अंतिम मौके पर सऊदी की तरफ से एक बड़ा डंडा आते हुए देख इमरान ख़ान ने इस मीटिंग में जाने से हाथ खींच लिए। पाक ने सोच शायद अब OIC की मीटिंग हो जाए।
जनवरी 2020

भारत ने मलेशिया को सज़ा देते हुए वहाँ से पाम आयल के इम्पोर्ट पर बैन लगा दिया। इससे मलेशिया की अर्थव्यवस्था पे लगभग 5% का धक्का लगा जिसके कारण मलेशिया की राजनीति में राष्ट्रपति महातिर के खिलाफ व्यापक रोष उत्पन्न हुआ और मार्च 2020 में वह अपने पद से हटाए गए|
6 अगस्त 2020

कश्मीर मुद्दे पर लगातार OIC की मीटिंग नही होने से बेहद खीज कर पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक नई इस्लामिक संस्था बनाने की माँग कर डाली। आगबबूला हुए सऊदी ने तुरंत पाक से 1B$ की उधारी वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया। जैसे तैसे चीन से पैसे लेकर पाक ने चुकाए।
इतना ही नहीं, सऊदी ने पाक को उधार पर सस्ता तेल देना बंद कर दिया और ग्वादर पोर्ट के निवेश को वापस लेने का इरादा दिखाया।

पाक आर्मी चीफ बाजवा भागते हुए सऊदी माफ़ी माँगने गए। सऊदी प्रिंस सलमान ने ना सिर्फ बाजवा से मिलने से इनकार किया बल्कि उनको दिया जा रहा मैडल भी कैंसिल कर दिया।
इधर लगातार तुर्की से दोस्ती बढ़ा रहे इमरान ख़ान पेशोपेश पे तब फंस गए जब 13 अगस्त को यूएई और इजराइल की डील हुई। दबे तौर पर पाक हमेशा से इजराइल से दोस्ती चाहता है लेकिन उसका सोचना यह है कि फ़िलिस्तीन पर समझौता करने का मतलब पाक के लिए कश्मीर मुद्दे का और कमजोर होना है।
लाज़िम तौर पर इस शांति समझौते का विरोध सिर्फ उन्हीं मुल्कों ने किया जिन्होंने 370 हटाने का विरोध किया।

ईरान, तुर्की, पाकिस्तान।

और यह कोई संयोग मात्र नही अपितु एक ही कहानी की दो कड़िया हैं। मलेशिया अभी वेट एंड वाच में है और ईरान से क्या चल रहा है वह मैंने पिछले थ्रेड में बताया।
अब आइये अंततः देखते हैं कि भारत के लिए इन सब के क्या मायने हैं।

• पाकिस्तान के तुर्की के और करीब जाने का मतलब यह कि उसके लिए सऊदी की सरपरस्ती लगभग खत्म जिसका मतलब की उसे दशकों से मिल रही आर्थिक मदद समाप्त। यह पाक को कंगाल करने के मोदी मिशन में बड़ी सफलता है (इसपे थ्रेड कभी और)
• OIC में विभाजन का अर्थ यह कि कश्मीर मुद्दे का सऊदी वाले बड़े कैम्प के लिए लंबे समय के लिए ठंढे बस्ते में चले जाना। तुर्की और ईरान दोनों अब सऊदी से मुस्लिम दुनिया की बादशाहत छीनना चाहते हैं। सऊदी के लिए एकमात्र प्राथमिकता इनदोनो से निपटना है। यह हमारे मिशन गिलगित मे लाभदायक है
• यूएई, बहरीन, कोसोवो के बाद अब शायद ओमान और सूडान का नंबर है। हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा कि बांग्लादेश क्या निर्णय लेता है। यह इतना महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यदि उसने इजराइल के पक्ष में निर्णय लिया तो इससे वहां पर चीनी प्रभाव के ऊपर भारत के प्रभाव की भरपूर पुष्टि होगी।
• जैसा कि मैंने अपने ईरान थ्रेड में कहा था कि विश्व में सिर्फ भारत एक ऐसा देश है जिसके ईरान/सऊदी/इजराइल और अमेरिका सबसे अच्छे संबंध है।

ऐसे में जब भी इन सब को एक टेबल पर लाना हो तब भारत की भूमिका बहुत बढ़ जाती है। ग्लोबल प्लेयर बनने के लिए ग्लोबल पीस मेकर बनना जरूरी होता है।
तो अंततः कहना चाहूंगा कि मिडिल ईस्ट में स्थापित हो रही शांति से हमारे लिए यह अवसर हैं

• कंगाल होता पाकिस्तान
• कश्मीर मुद्दे पर अरब सहयोग
• पड़ोसी बंगलादेश पर प्रभाव की पुष्टि
• अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति में बड़ी भूमिका

टीम मोदी को मजबूत करते रहिए, अच्छी चीज़े हो रही है 😊
मैंने आसान भाषा में फॉरेन रिलेशन्स के इन मुद्दों को टॉक शो तथा एक्सप्लेनेर वीडियो के माध्यम से समझाने के लिए अपना यूट्यूब चैनल बनाया है।

ऐसी ही काफी स्क्रिप्ट्स पे काम कर रहा हूँ और जल्द ही वीडियोस डालूंगा।

कृप्या चैनल सब्सक्राइब कर के हौसला बढ़ाये। 🙏

youtube.com/channel/UCAz3u…

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6 Sep
रूस में चीन के साथ हुई मीटिंग के बाद वापस घर लौटने के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कल अचानक ईरान का दौरा किया।

कुछ वक्त पहले चीन के ईरान में 400B$ के प्रस्तावित निवेश की बाते आयी और ऐसे में भारत के लिए इस वक़्त ईरान को साध के रखने की बड़ी चुनौती है।

आइये कुछ पहलू देखते हैं! Image
ईरान भारत के लिए क्यों आवश्यक है?

• ईरान काफी कम कीमत पर हमें तेल की आपूर्ति करता रहा है तथा वो भी डॉलर नही बल्कि रुपये लेकर

• भारत ईरान का चाबहार पोर्ट बना रहा है जोकि स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में भारत की उपस्थिति दर्ज कराएगा तथा चीनी ग्वादर पोर्ट के प्रभाव को कम करेगा। Image
• भारत, ईरान और रूस ने 2002 में इंटरनेशनल नार्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का प्रोजेक्ट शुरू किया जिसमें भारत के मुम्बई से निकल कार्गो ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट से सेंट्रल एशिया होता हुआ रूस तक जाता है। यह 7200 किमी लंबी परियोजना व्यावसायिक प्रयोग हेतु लगभग तैयार है। Image
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3 Jul
ब्रिटेन ने हॉन्ग कॉन्ग के निवासियों को अपने देश की नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा है। ऐसा ब्रिटेन इसलिए कर रहा है क्योंकि 1997 में उसने यह शहर इस शर्त पर चीन को वापस दिया था कि अगले 50 साल तक वहाँ वन कंट्री टू सिस्टम्स चलेगा, लेकिन चीन ने हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता छीन ली है।

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हॉन्ग कॉन्ग के प्रताड़ित लोगो को नागरिकता देने का स्वागत होना चाहिए और हो भी रहा है। किंतु आश्चर्य की बात यह है कि इसका स्वागत वह लोग भी कर रहें है जो खुल कर CAA के विरोध में हैं।

अरे भाई औपनिवेशिक संबंधों के आधार पर ब्रिटेन करे तो सही, खून के संबंधों को मोदी बुलाये तो गलत?

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चर्चा उठी ही है तो आइए आज यह समझ लें कि CAA का आधार क्या है, वह क्यों आवश्यक है, किस प्रकार से वह बिल्कुल भी भेदभावपूर्ण नहीं है तथा किस आधार पर वह पूर्णतया संवैधानिक है।

आइये देखते हैं कि CAA के खिलाफ किस तरह से कुतर्क फैलाये गए और असली तथ्य तथा तर्क क्या है।

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16 Jun
एक एक कड़ी जुड़ते हुए दिखाई दे रही है

■ भारत ने पिछले महीने में LOC पर गतिविधियां बढ़ा दी हैं। @FrontalAssault1 ने रिपोर्ट किया कि इतनी भयंकर गोलीबारी भारत ने पिछले 17 साल में नहीं की है। कराँची, हाजीपीर, नीलम वैली में दवाब बना कर हम गिलगित अधिग्रहण की दिशा में बढ़ चुके है
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@drapr007 ने रिपोर्ट किया कि 2 हफ्ते पहले चीनियों ने बैकडोर से भारत को गिलगित लेने और POK छोड़ देने की पेशकश की। भारत ने साफ इंकार कर दिया। अब चीन की छटपटाहट है कि कैसे भी इन सब के बीच CPEC में लगे उसके 60 बिलियन डॉलर नहीं फँसने चाहिए

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■ जैसा कि मैंने कहा, CPEC सिर्फ एक प्रोजेक्ट नही बल्कि इलेवन जिनपिंग के ड्रीम "बॉर्डर रोड इनिशिएटिव" का मणि है, फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है।
अगर CPEC फेल हुआ तो दुनिया जानेगी की चीनियों के विस्तारवाद को रोका जा सकता है, और दुनिया ये भी जानेगी की ऐसा सिर्फ भारत कर सकता है।

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10 Jun
Why does China not settle it's border issue with India?

While China could simply propose to convert the LAC into an international border and settle the issue with India. So why don't they take any initiative on this?

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- China is the expansionist force who has acquired more than 50% of its land by expansion and reneging on old contracts. That is how they occupied Tibet and Uyghur province, inner Mongolia and Manchuria. None of these were original China. Communist China simply expanded

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- Communist China doesn't mean to settle any Boundary dispute because most of these agreements were made with Imperial China. The original heir of Imperial China is now Taiwan. Most of these documents are possibly in some vault in Taiwan. What can China bring to the table?

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Read 13 tweets
5 Jun
हम भारतीयों में से भी बहुतों ने इजराइल और अरब देशों के बीच 1967 में लड़े गए "सिक्स डे वार" के बारे में अवश्य सुना होगा। इजराइल के उस अप्रत्याशित औऱ आश्चर्यजनक विजय को आज 43 साल हो गए।

आइये आज आपको इस युद्ध की पृष्ठभूमि में महान इसरायली जासूस एली कोहेन की रोचक कहानी बताता हूँ। Image
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान तथा उसके बाद भी भीषण प्रताड़ना झेलते हुए दुनिया भर के यहूदी उस जगह जमा होने लगे जिसे आज इजराइल कहते हैं।

एली के माता पिता तथा 3 भाइयों ने 1949 में इजिप्ट छोड़ कर इजराइल आये लेकिन एली के सर पर तो दूसरा जुनून सवार था, इसलिए वह इजिप्ट में ही रुक गया।

2/n
इजिप्ट में रह कर वह गुपचुप तरीके से यहूदियों को इजराइल पहुँचाने का कार्य करता रहा। आपरेशन गोशेन के तहत उसने 10000 से ज्यादा यहूदियों को इजराइल पहुँचाया।
इजिप्ट की मिलिट्री को एली पर शक हुआ, उसने एली को गिरफ़्तार किया लेकिन पूरी कोशिश के बाद भी कुछ भी साबित नही हुआ।

3/n
Read 24 tweets
30 May
चाइना की भारत के खिलाफ मोतियों की माला और उस माला का मणि चाइना पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर।

मोदी सरकार का किसी भी कीमत पे CPEC को रोकने का संकल्प और परिणामस्वरूप चीन की बौखलाहट।

आइये वक़्त में ज़रा पीछे चल कर आपको पूरी यात्रा दिखाते हैं।

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1/n
लगभग सन 2005 का वक़्त

चीन ने दक्षिण चीन सागर से लेकर मलक्का स्ट्रेट, बंगाल की खाड़ी और अरब की खाड़ी तक, यानि की पूरे हिंद महासागर में बंदरगाह, हवाई पट्टी, निगरानी-तंत्र इत्यादि तैयार करने की योजना बनाई।

(चित्र देखें)

2/n
हालांकि चीन का हमेशा से यह कहना रहा है कि इसका उद्देश्य सिर्फ नए ऊर्जा स्रोतों को ढूंढना तथा समुन्द्री आवागमन की सुरक्षा है परंतु यह बात छुपी हुई नही है कि इसके द्वारा चीन की रणनीति हिन्द महासागर में भारत के प्रभुत्व समाप्त करना है जिससे वह युद्ध स्थिति में भारत को घेर सके।

3/n
Read 41 tweets

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