योगी श्री ब्रह्मचारी नर्मदाशंकर जी महाराज मूलतः यूरोप के देश आस्ट्रिया के निवासी हैं ....!!
आस्ट्रियन माता-पिता की संतान अपनी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर 1984 में 21 वर्ष की उम्र में भारत भ्रमण हेतु हिमालय और अन्य जगह यात्रा करके गाँधी जी के आश्रम साबरमती आए .
वहां आश्रम में उन्होंने ओंकारेश्वर का एक चित्र देखा और पूछा कि..." ये कौन सी जगह है..? पता चला कि ओंकारेश्वर है ....!!

वो तस्वीर ऐसी भायी की ओंकारेश्वर पर्वत की ॐ सी दिखने वाली फ़ोटो को देखके वो उसकी ओर खींचे चले जाते हैं और उन्हें लगता है कि कोई शक्ति उनको ओंकारेश्वर
की तरफ खींच रही है ....!!
1984 में ओंकारेश्वर बेहद पिछड़ा सा इलाका था ..!! रात को किसी तरह एक धर्मशाला मिल गयी ..!!

थकान बहुत थी सो नींद जल्दी ही लग गयी..!!
सुबह होते ही जैसे ही बाहर का नज़ारा देखा कि ओंकारेश्वर से प्यार हो गया ....!!

माँ नर्मदा सामने थीं – तट पर
लोग कर्मकांड कर रहे थे – दूर पहाड़ थे ....!!

ओंकारेश्वर घूमते घूमते उन्हें दूर पहाड़ पर एक गुफा दिखी ..!!
गुफा में उनकी मुलाकात उनके गुरु भाई किशन दास जी से हुयी ....!!

किशन दास जी (फक्कड़ बाबा) से उन्होंने पूछा कि क्या वो भी उनके साथ आकर रह सकते हैं तो उन्हें जवाब मिला
हाँ ....!!
तो अब एक यूरोपियन इंजीनियर भी गुफा में रहने लगा ..!!

बाबा नर्मदा शंकर को लगा कि किशन सुबह 4 बजे उठकर कहीं जाते हैं तो एक दिन उन्होंने देखा कि ऊपर पहाड़ से उनके गुरु उतर कर आते हैं और ये सभी नर्मदा माँ में स्नान करने जाते हैं .... सो शुरुआत हुयी गुरु से मिलने
की ....!!

गुरुदेव श्री रघुनाथ जी महाराज यम नियम के बेहद कड़े गुरु थे बाबा नर्मदाशंकर को देखते ही बोले तुम्हारी असली मंजिल यही है और हमे तुम्हारा ही इंतज़ार था ....!!

कुछ समय बाद उनका वीजा ख़त्म हो रहा था और उन्हें वापस ऑस्ट्रिया लौटना था ....!!

वहां जाकर एक अदभुत घटना घटी
जब वो वीजा लेने भारतीय एम्बेसी गए और इंडियन काउंसल से मिले तो उन्होंने कमरे में घुसते ही कहा नर्मदे हर ....!!

काउंसल बहुत खुश हुआ क्योंकि वो भी जबलपुर का था ..उन्होंने पूछा आप भारत में कब तक रहना चाहते हो – बाबा ने जवाब दिया "मरते दम तक". काउंसलर ने उन्हें एक्स वीजा दे दिया जो
जो अगले 17 साल तक उन्हें भारत में रहने के लिए काफी था और फिर उसके बाद 2008 में उन्होंने भारतीय नागरिकता ले ली
इस दौरान उन्होने नर्मदा परिक्रमा पूरी की जिसे एक योगी 3 साल 3 महीने और 13 दिन में पूरी करते हैं
नंगे पाँव उन्होंने 3300 किलोमीटर की ये लम्बी यात्रा पूरी की
नर्मदे हर

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31 Jul
जानकी माता ने कहा कि हनुमान एक बात बताओ बेटा तुम्हारी पूंछ नहीं जली आग में और पूरी लंका जल गई?

श्री हनुमान जी ने कहा कि माता! लंका तो सोने की है और सोना कहीं आग में जलता है क्या?

फिर कैसे जल गया? मां ने पुनः पूछा... ?

हनुमान जी बोले-- माता! लंका में साधारण आग नहीं लगी थी .. Image
पावक थी •••• !(पावक जरत देखी हनुमंता ..)

पावक ••••• ?

हाँ मां ••••• !

ये पहेलियाँ क्यों बुझा रहे हो, पावक माने तो आग ही है।

हनुमान जी बोले-- न माता! यह पावक साधारण नहीं थी।

फिर ..

#जो_अपराध_भगत_कर_करई
#राम_रोष_पावक_सो_जरई।।

यह राम जी के रोष रूपी पावक थी
जिसमे सोने की लंका जली।

तब जानकी माता बोलीं-- बेटा ! आग तो अपना पराया नहीं देखती, फिर यह तो बताओ•••यह तुम्हारी पूंछ कैसे बच गई? लंका जली थी तो पूंछ भी जल जानी चाहिए थी ।

हनुमान जी ने कहा कि माता! उस आग में जलाने की शक्ति ही नहीं, बचाने की शक्ति भी बैठी थी।

मां बोली --
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30 Jul
Ancient temples have always been one of the most amazing threads in the tapestry of Indian culture, and Gujarat surely has an spectacular array of temples to consider when charting out your next trip to the state.

The Modhera Sun Temple was made by King Bhima I of the Chalukya Image
dynasty in the early 11th century.
It is a temple made to honour the Sun God in Modhera village of Mehsana district on the bank of River Pushpavati. The temple complex is divided into three parts – Gudha Mandapa (the shrine hall), Sabha Mandapa (the assembly hall) and
Kunda (the reservoir).

The temple is designed in such a way that during every equinox, the first ray of the rising sun would fall on a diamond placed on the head of the Sun God. This would also light up the shrine with a golden glow.

The Sabha Mandap stands on 52 pillars,
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29 Jul
Bhimbetka, the treasure of rock shelters, is believed to be home to many over centuries. One of the residents influenced the name.
What supports this legend are the names of the villages around Bhimbetka. One village is named Pandapur while Bhiyapura is believed to be derived
from Bhimpura. Legend says that the Lakhajuhar forest was once the wax (lakh) palace of the Pandavas.
These rock caves are believed to be the oldest petroglyphs in the world. Some of the rock paintings in the area are very similar to aboriginal rock art found in Australia and the
Paleolithic Lascaux cave paintings discovered in France. Despite there being more than 700 rock shelters, only 12 to 15 are open and accessible to visitors.
The sudden discovery of these caves allow us a rare opportunity to look into the past and the lifestyle of the times. It
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28 Jul
कौन था पहला कावड़िया .??

किसने किया था सबसे पहले शिव लिंग का जल अभिषेक.?

श्रावण का महीना आते ही हर कोई शिव की भक्ति में झूमने लगता है. इस पावन त्यौहार में पूरे उत्तर भारत और अन्य राज्यो से कावड़िये शिव के पवित्र धामो में जाते है तथा वहां से गंगाजल लाकर शिव का जलाभिषेक करते
है.

कावड़ियो को नंगे पैर बहुत दूर चलकर गंगा जल लाना होता है तथा शर्त यह होती है की कावड़ी, शिव कावड़ को जमीन में नही रखता. इस प्रकार शिव भक्त अनेक कठिनाइयों का समाना करके गंगा जल लाते है तथा उससे शिव का जलाभिषेक करते है.

परन्तु क्या आपने कभी यह सोचा है की आखिर वह कौन पहला
व्यक्ति होगा जो सबसे पहला कावड़ी था तथा जिसने सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनकी कृपा प्राप्त करी व इस परम्परा का आरम्भ हुआ.

एक बार राजा सहस्रबाहु ऋषि जमदग्नि के यहाँ पधारे। ऋषि जमदग्नि ने उनका बहुत अच्छी तरह से आदर सत्कार किया उनकी सेवा में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी .
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1 Jul
The science behind Hindu temple bells-

A Temple bell have a scientific phenomena; it is not just your ordinary metal

It is made of various metals including cadmium, lead, copper, zinc, nickel, chromium & manganese.

These bells are made to produce such a distinct sound that
it can create unity of your Left & Right Brain

The bell produces sharp but lasting sound which lasts for minimum of 7 seconds in echo mode good enough to touch your 7 healing centres or chakras in your body.

The moment bell sound happens your brain is emptied of all thoughts.
Invariably you will enter state of Tran’s state where you are very receptive. This Trans state is the one with awareness

You are so occupied in mind that only way to awaken you is with a Shock!

Bell works as Anti-dote to your mind
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