सबसे पहले तो सवाल को देखकर समझ नहीं आया कि प्रश्नकर्ता ने" हिंदू ब्राह्मण " के बारे में पूछा है मतलब मुस्लिम, क्रिश्चियन में भी ब्राह्मण होते हैं क्या 🤔
शायद प्रश्नकर्ता आजकल की धर्म वाली राजनीति से प्रेरित है जो चुनाव के समय चमकती है इसलिए ब्राह्मण के बारे में पूछा है। लेकिन मुझे पता है कि "ब्राह्मण" केवल हिंदुओं में ही होते हैं इस बात को ध्यान में रखकर जवाब लिख रह हु।
इस तरह के सवाल किसी धर्म, जाति का अपमान करने वाले लगते हैं क्योंकि लालच एक मनुष्य प्रवृति है इसका हिंदू, ब्राह्मण से संबंध नहीं है लेकिन लोगों के मन में साधारण पूजा पाठ करने वाले ब्राह्मण, पुजारी को देखकर ऐसी बातें उठती हैं तो बड़ा बुरा लगता है
प्रश्न = भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से राम और कृष्ण ही इतने प्रसिद्ध क्यों है और बाकी 8 अवतारों की लीलाओं का वर्णन क्यों नही है ?
किसने कहा श्रीमान कि भगवान विष्णु के अन्य अवतारों की लीलाओं का वर्णन ही नहीं है?
वास्तव में श्रीहरि के पहले 5 अवतारों पर तो पूरे के पूरे महापुराण लिखे गए हैं, जो उन्हें ही समर्पित हैं और जिनमें उनकी लीलाओं का विशेष रूप से वर्णन दिया गया है।
श्रीहरि के पहले 5 अवतारों पर क्रमशः मत्स्य पुराण, कूर्म पुराण, वाराह पुराण, वामन पुराण एवं नृसिंह पुराण लिखे गए हैं।
इनमें से पहले 4, अर्थात मत्स्य, कूर्म, वाराह एवं वामन महापुराण माने जाते हैं और नृसिंह पुराण को उप-पुराण की श्रेणी में रखा जाता है।
नारायण के अन्य अवतारों - भगवान परशुराम, श्रीराम, हलधर बलराम और श्रीकृष्ण के विषय में अलग से पुराण नहीं हैं
पौराणिक मान्यताओ के अनुसार बैकुंठधाम किसे कहते हैं ?
देखिए वैकुंठ लोक एक ग्रह है जहां इस ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले भगवान विष्णु निवास करते हैं।
वैकुंठ धाम भक्तों के लिए अंतिम यात्रा पड़ाव है। भक्ति मैं लीन पुण्यात्माओं को वैकुंठ धाम में रहने का अवसर मिलता है।
वैकुंठ लोक मकर राशि की दिशा में सत्यलोक से 2 करोड़ 62 लाख योजन ऊपर स्थित है।
यह वैकुंठ धाम ना तो सूर्य से और ना ही चंद्र से प्रकाशित होता है। इसकी देखभाल करने के लिए भगवान के 96 करोड़ पार्षद तैनात हैं। सभी पार्षद भगवान की तरह ही चतुर्भुज आकार में रहते हैं।
इस परमधाम में प्रवेश करने से पहले जीवात्मा विरजा नदी में स्नान करता है और चतुर्भुज रुप प्राप्त करता है।
इस वैकुंठ धाम में श्रीविष्णु श्रीदेवी, भूदेवी, नीला देवी और महालक्ष्मी के साथ निवास करते हैं।
वेदों और पुराणों में देखने को मिल जाते हैं कि जंतुओं ने भी सीधे अपनी योनि से मोक्ष की प्राप्ति की है। महाभारत में पांडवों के महाप्रयाण के समय एक कुत्ते का प्रसंग आता जिसे उन लोगो के साथ ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जो वास्तव में धर्मराज थे।
महाभारत में ही अश्वमेघ यज्ञ के समय एक नेवले का भी प्रसंग आता है। जिसे युधिष्ठिर के अश्वमेघ यज्ञ से अधिक पुण्य एक गरीब के आटे से मिला था और बाद में उसको भी मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। विष्णु पुराण एवं गरुड़ पुराण में एक गज(हाथी) और ग्राह(मगरमछ) की कथा आती है
जिनको प्रभु विष्णु के द्वारा मोक्ष प्रदान किया गया था। वह ग्राह पूर्व जन्म में गन्धर्व और गज एक प्रभु भक्त राजा थे लेकिन कर्मफल के कारण उनका अगला जन्म में पशु योनि में हुआ था।
प्रश्न = किस तरह से चौरासी लाख योनियों के चक्र का शास्त्रों में वर्णन है ?
धर्म शास्त्रों और पुराणों में 84 लाख योनियों का उल्लेख मिलता है और इन योनियों को दो भागों में बाटां गया है। पहला- योनिज और दूसरा आयोनिज।
1- ऐसे जीव जो 2 जीवों के संयोग से उत्पन्न होते हैं वे योनिज कहे जाते हैं। 2- ऐसे जीव जो अपने आप ही अमीबा की तरह विकसित होते हैं उन्हें आयोनिज कहा गया है
3- इसके अतिरिक्त स्थूल रूप से प्राणियों को भी 3 भागों में बांटा गया है-
1- जलचर- जल में रहने वाले सभी प्राणी।
2- थलचर- पृथ्वी पर विचरण करने वाले सभी प्राणी।
3- नभचर- आकाश में विहार करने वाले सभी प्राणी। उक्त 3 प्रमुख प्रकारों के अंतर्गत मुख्य प्रकार होते हैं अर्थात 84 लाख योनियों में प्रारंभ में निम्न 4 वर्गों में बांटा जा सकता है।