यह तो आधुनिक विज्ञान भी कहता है कि बिना कारण के कोई क्रिया नहीं होती, बिना क्रिया के कोई कर्म नहीं होता और बिना कर्म के कोई परिणाम (फल) नहीं होता। एक ही क्रिया से एक से अधिक कर्म भी होते हैं।
अब प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य बिना कर्म किये कैसे जी सकता है? और जब वह कर्म करेगा तो उसे उनके फल भी भोगने होंगे। तो वह कर्मफल-शून्य कैसे हो और कैसे वह इन योनियों के चक्र से छूटे? इस सम्बंध में मेरा पंथ कहता है कि यदि मनुष्य ईश्वर के कहे वचनों के अनुसार निष्काम भाव से जीवन
व्यापन करे तो उसे उसके द्वारा किये गए कर्मों के फल नहीं भोगने पड़ेंगे। अब ईश्वर के वचन तो बहुत हैं और उन सबका मनुष्य को ज्ञान भी नहीं होता। तो चाहकर भी वह कैसे उन वचनों का पालन करे। तो समझने के लिए इसका एक व्यावहारिक उपाय है।
वह ऐसे कि मनुष्य कुछ भी करे लेकिन ऐसा कोई कर्म न करे जिसके करने से किसी अन्य जीव को किसी भी प्रकार का शारीरिक, भावनात्मक या मानसिक कष्ट पहुँचता हो।
जैसा कि ऊपर कहा गया है, ईश्वर के वचनों के अनुसार निष्काम भाव से आचार करने पर जीव को कोई पाप-पुण्य के कर्मलेप नहीं लगते और इसके साथ ही मनुष्य के विकार (काम, क्रोध, राग, द्वेष, मद, मत्सर आदि) कम होते होते शून्य हो सकते हैं।
ऐसा मनुष्य जिसके ये विकार हट जाएँ वह स्वाभाविक रूप से ही कभी किसी को शारीरिक या मानसिक कष्ट नहीं पहुंचाता। वह अपने प्रारब्ध में आए कर्मफलों को भोगकर और नए कर्मफल न जोड़ते हुए कर्म फलों से शून्य हो सकता है|
उपरोक्त अवस्था में तो विरले ही पहुँच पाते हैं, परंतु जो पहुँचते हैं उनके लिए मोक्ष का द्वार खुल जाता है।
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ग्रन्थों मैं ज्ञान-विज्ञान की बहुत सारी बातें भरी पड़ी हैं। आज का विज्ञान जो खोज रहा है वह पहले ही खोजा जा चुका है। बस फर्क इतना है कि आज का विज्ञान जो खोज रहा है उसे वह अपना आविष्कार बता रहा है और उस पर किसी पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों का लेबल लगा रहा है।
हालांकि यह इतिहास सिद्ध है कि भारत का विज्ञान और धर्म अरब के रास्ते यूनान पहुंचा और यूनानियों ने इस ज्ञान के दम पर जो आविष्कार किए और सिद्धांत बनाए उससे आधुनिक विज्ञान को मदद मिली। यहां प्रस्तुत है भारत के उन दस महान ऋषियों और उनके आविष्कार के बारे में।
महृषि कणाद = परमाणु सिद्धांत के आविष्कारक : आधुनिक दुनिया जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर को परमाणु का अविष्कारक मानती है लेकिन उनसे हजारो साल पहले कणाद ने वेदों मैं लिखे सूत्रों के आधार पर परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था
भारतीय इतिहास में ऋषि कणाद को परमाणुशास्त्र का जनक माना जाता है
सबसे पहले तो सवाल को देखकर समझ नहीं आया कि प्रश्नकर्ता ने" हिंदू ब्राह्मण " के बारे में पूछा है मतलब मुस्लिम, क्रिश्चियन में भी ब्राह्मण होते हैं क्या 🤔
शायद प्रश्नकर्ता आजकल की धर्म वाली राजनीति से प्रेरित है जो चुनाव के समय चमकती है इसलिए ब्राह्मण के बारे में पूछा है। लेकिन मुझे पता है कि "ब्राह्मण" केवल हिंदुओं में ही होते हैं इस बात को ध्यान में रखकर जवाब लिख रह हु।
इस तरह के सवाल किसी धर्म, जाति का अपमान करने वाले लगते हैं क्योंकि लालच एक मनुष्य प्रवृति है इसका हिंदू, ब्राह्मण से संबंध नहीं है लेकिन लोगों के मन में साधारण पूजा पाठ करने वाले ब्राह्मण, पुजारी को देखकर ऐसी बातें उठती हैं तो बड़ा बुरा लगता है
प्रश्न = भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से राम और कृष्ण ही इतने प्रसिद्ध क्यों है और बाकी 8 अवतारों की लीलाओं का वर्णन क्यों नही है ?
किसने कहा श्रीमान कि भगवान विष्णु के अन्य अवतारों की लीलाओं का वर्णन ही नहीं है?
वास्तव में श्रीहरि के पहले 5 अवतारों पर तो पूरे के पूरे महापुराण लिखे गए हैं, जो उन्हें ही समर्पित हैं और जिनमें उनकी लीलाओं का विशेष रूप से वर्णन दिया गया है।
श्रीहरि के पहले 5 अवतारों पर क्रमशः मत्स्य पुराण, कूर्म पुराण, वाराह पुराण, वामन पुराण एवं नृसिंह पुराण लिखे गए हैं।
इनमें से पहले 4, अर्थात मत्स्य, कूर्म, वाराह एवं वामन महापुराण माने जाते हैं और नृसिंह पुराण को उप-पुराण की श्रेणी में रखा जाता है।
नारायण के अन्य अवतारों - भगवान परशुराम, श्रीराम, हलधर बलराम और श्रीकृष्ण के विषय में अलग से पुराण नहीं हैं
पौराणिक मान्यताओ के अनुसार बैकुंठधाम किसे कहते हैं ?
देखिए वैकुंठ लोक एक ग्रह है जहां इस ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले भगवान विष्णु निवास करते हैं।
वैकुंठ धाम भक्तों के लिए अंतिम यात्रा पड़ाव है। भक्ति मैं लीन पुण्यात्माओं को वैकुंठ धाम में रहने का अवसर मिलता है।
वैकुंठ लोक मकर राशि की दिशा में सत्यलोक से 2 करोड़ 62 लाख योजन ऊपर स्थित है।
यह वैकुंठ धाम ना तो सूर्य से और ना ही चंद्र से प्रकाशित होता है। इसकी देखभाल करने के लिए भगवान के 96 करोड़ पार्षद तैनात हैं। सभी पार्षद भगवान की तरह ही चतुर्भुज आकार में रहते हैं।
इस परमधाम में प्रवेश करने से पहले जीवात्मा विरजा नदी में स्नान करता है और चतुर्भुज रुप प्राप्त करता है।
इस वैकुंठ धाम में श्रीविष्णु श्रीदेवी, भूदेवी, नीला देवी और महालक्ष्मी के साथ निवास करते हैं।