नाम में क्या रखा है ? 👁️➰👁️ Profile picture
#यात्री... इतिहास,संस्कृति, प्रेम,फिल्म से सम्बंधित बहुत सारी किताबों के ड्राफ्ट वाले टाइप बाबू जो मंडली, ऑप इंडिया, indic today, swarajmag में भी लिखते हैं।
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9 Aug
केरल में पिछली रात हुए हादसे के बारे में जितना जानेंगे, पायलट दीपक साठे के लिए उतना ही सम्मान महसूस होगा और आप गर्व से भर उठेंगे।
लैंडिंग गियर फेल होने के बाद कैप्टन साठे ने सबसे पहले यह सुनिश्चित किया था कि बचा हुआ ईंधन ख़तम किया जाए जिसके लिए वो हवाई अड्डे का चक्कर लगाते रहे। लैंडिंग से ठीक पहले, उन्होंने इंजन बंद कर दिया था। इन उपायों ने ये सुनिश्चित किया था कि विमान किसी भी हालत में आग नहीं पकड़ेगा।
वो जानते थे कि कोझिकोड एक टेबल-टॉप रनवे है। वो ये भी जानते थे कि अत्यधिक बारिश के कारण रनवे पर फिसलन होगी। वो ये भी जानते थे कि क्रेश लैंडिंग विमान के सामने के हिस्से को सबसे ज़्यादा प्रभावित करेगा।

लेकिन अपनी जान जोखिम में डालते हुए उन्होंने क्रेश लैंडिंग करा ही दी।
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27 Jul
कहा जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य  ने ब्राह्मण समाज के लोगों में से धर्म की हानि रोकने के लिये एक नये सम्प्रदाय की स्थापना की जिन्हे गोस्वामी / गोसाईं कहा गया और उन्हें दस भागों में विभाजित किया गया।
गोस्वामी समाज को ऋषियों की संतान भी कहा जाता है ये दसों नाम के गोस्वामी समाज के चार अलग-अलग ऋषि है।

गिरि ,पर्वत और सागर के ऋषि हैं भ्रुगु।
पुरी,भारती और सरस्वती जिनके ऋषि हैं शांडिल्य। वन और अरण्य के ऋषि हैं कश्यप तथा तीर्थ और आश्रम के ऋषि अवगत हैं।
आपको आश्चर्य होगा यह जानकर कि
उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध में अंग्रेजों के शासनकाल में शैव गोसाइयों ने शस्त्र धारण कर लिए थे। इनमे से कुछ लोग मराठों की फौज में भी भर्ती होकर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध में शामिल हुए थे।
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26 Jun
एक चक्र था जिसके पूर्ण होने पर ही सोनिया के हाथ में सत्ता आती।
संजय नहीं जाते तो राजीव, इंदिरा की सत्ता के हकदार होते। इंदिरा नहीं जाती तो, राजीव सत्ता पर काबिज नहीं होते।
और अगर राजीव नहीं जाते तो सोनिया को सत्ता नहीं मिलती।
राहुल को नशे का आदी कैसे बनाया गया ?
प्रियंका को स्थापित करने के लिए क्या रॉबर्ट का बलिदान दिया जाएगा?ये सब जब सत्ता के गलियारों में कानाफूसी चलती रहती है तो क्या तत्कालीन सरकार ने कुछ नहीं सुना होगा।इस सरकार के पास छः साल में नकेल डालने को इतना कुछथा कि वो शांति से भारत को सिर्फ आगे ले जाने के बारे में सोच सकते थे।
पर इस सरकार ने क्यूं नहीं किया ऐसा कुछ उस परिवार के खिलाफ ?
राजीव फाउंडेशन वाले काग़ज़ात क्या चीन मुद्दे को हल करने के लिए दबा कर रखे थे?
ऐसे कितने ही मामले है जहां सरकार इस परिवार को धूल चटवा सकती थी किन्तु आज भी वही परिवार देश पर राज कर रहा है।
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20 Jun
गुल्लक कई तरह की होती थी।मिट्टी वाली की कहानी किसी और दिन सुनाऊंगा पर हमे पोंड्स के पाउडर के डिब्बे में बनाई गई गुल्लक भी याद है।

पिग्गी बैंक वाली फैमिली में नहीं बड़े हुए हम,
गुल्लक वाले हैं हम..

आप पिग्गी बैंक वाले या गुल्लक वाले? Image
टोंटी घिस्वाना क्या होता है किसे पाता है ???

पिदाना क्या होता है किसे पता है ??
इस कॉपी के पहले पेज पर लिखा जाता था प्रभु का नाम और फिर चढ़ाया जाता था हिंदी के अखबार का कवर।
अंग्रेजी अखबार के कवर वाले रईस समझे जाते थे और बांसी पेपर के कवर वाले राय बहादुर....

उन पर नेम स्लिप लगा कर लाना अंबानी माना जाता थे उन दिनों..

जियोमेट्री बॉक्स की यादें कल.... Image
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2 Jun
सोशल मीडिया आपको, आपसे छीन लेता है। आप के अंदर हर एक "फॉलोअर" के साथ घमंड बढ़ जाता है और फिर आप जिनको भैया, सर, गुरु, पिता स्वरूप मानते थे उनके बारे में अनर्गल प्रलाप करने लगते हैं।

आप अपने को "महान" समझने लगते है।
चने का झाड़ मुस्कुरा कर आपका ऊपर आने का इंतजार कर रहा होता है।
आप भूल जाते हैं इस माध्यम का "थंब रूल" कि यहां सबको बड़ा बनना है।
आप भूल जाते हैं कि आप बाल्टी के केकड़े है।
आप भूल जाते हैं कि ईर्ष्या मनुष्य के स्वभाव से जा नहीं सकती।
आप भूल जाते हैं कि आपकी सो काल्ड "उन्नति" यहीं "आपके दोस्तों" को रोज़ दिखती है।

आप भूल जाते हैं....
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18 May
"आप अगर अच्छे हैं तो आपके साथ अच्छा ही होगा, बुरा हो ही नहीं सकता" ये बात बचपन से सुनता आया हूं और देखता आया हूं।

मुझे कभी भी, ज़्यादातर, परेशानियों का सामना करना नहीं पड़ता जो अमूमन हम सभी के साथ आ जाती हैं।
जैसे रास्ते में पेट्रोल ख़तम होना, ट्रेन में सीट नहीं मिलना, मंदिरों में दर्शन के समय लंबी लाइन होना या ऐसी जगह पंचर होना जहां पंचर वाले साहब ना हो।
बात उन दिनों की है जब मै बुलंदशहर में था और अपनी नौकरी के सिलसिले में पूरे जिले के चक्कर लगाता रहता था।
ककोड़, झाजर, पहासू आदि..
कुछ कस्बे ऐसे थे कि जहां डॉ कम थे तो कॉल एवरेज पूरा करने के लिए , दो या तीन कस्बों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
ककोड़, झाजार भी ऐसे ही था जिसके साथ हम पहासू भी जाया करते थे।
इसी कारण पहासू पहुंचते हुए दोपहर हो जाती थी और लौटते हुए देर रात हो जाती थी।
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29 Apr
हम आम नागरिक आज जब #covid
से अपने अपने स्तर पर जूझ रहे हैं। इस महामारी के बाद दुनिया तो बदल ही जानी है , ये तो तय है। बेरोज़गारी सबसे बड़ी समस्या होने वाली है ये भी तय ही है। आज सभी अपने परिवार के भविष्य के बारे में चिंतित हैं।
और ये कोई अचरज की बात भी नहीं...
हम सभी का अपने परिवार के प्रति एक दायित्व होता है, कर्तव्य होता है जिसे परिवार के मुखिया होने के नाते हम सभी को निभाना पड़ता है।

आपको अपने स्वयं के दुख, दर्द सभी एक कोने में रखकर सर्वप्रथम अपने परिवार के बारे में सोचने को बाध्य होना ही पड़ता है।
अब ऐसे में एक ऐसे परिवार के मुखिया के मन में क्या क्या चलता होगा ?
आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, स्वस्थ जीवन आदि...
और अगर परिवार के सदस्य करीब करीब १३० करोड़ हों तो उस परिवार के मुखिया की जीवनचर्या कैसी होती होगी ?
क्या क्या सवाल होते होंगे मुखिया के मन में ?
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24 Apr
ज़रूरत तो नहीं थी किन्तु अब बात निकली है तो दूर तलक तो जाएगी ही।

आइए आज आपका थोड़ा गहराई से परिचय कराता हूं, #AntoniaMaino जी से और उनके परिवार से।
लगे हाथ आपको उनके अपराधिक मामलों के बारे में भी बताता जाऊंगा।
चुनाव के हलफनामे (2004) में हमेशा यह दावा किया गया था कि #SoniaGandhi ने @Cambridge_Uni (स्निपेट -1) में अपनी पढ़ाई की है, जिसे कुछ समय बाद में कैंब्रिज के लेनोक्स कुक स्कूल में बदल दिया गया।
1972 में, #AntoniaMainoSonia ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओरिएंटल फायर इंश्योरेंस के बीमा एजेंट रूप में अपनी नौकरी की शुरुआत की लेकिन अपने व्यवसाय के पते के तौर पर तत्कालीन प्रधान मंत्री और उनकी सास श्रीमती इंदिरा गांधी का आधिकारिक पता दिखाया। 

ये सरासर एक अपराध था..
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21 Apr
लोग मुझे अनुवादक बना कर ही छोड़ेंगे।
मुझे लोग टैग करने लगे है अब इस काम के लिए।
लेकिन मुझे भी लालच आ जाता है।
इतना अच्छा लिखते हैं कुछ लोग कि लगता है कि इसको आम आदमी तक पहुंचना चाहिए।

चलिए पढ़ते हैं हिंदी में...
तेल की गुणवत्ता के सबसे लोकप्रिय ग्रेड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियरी (WTI) और ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड (ब्रेंट) हैं।

ब्रेंट उत्तरी सागर में 15 तेल क्षेत्रों का एक मिश्रण है।  यह विश्व उत्पादन का 2/3 हिस्सा है और  अफ्रीका, यूरोप + मध्य पूर्व के लिए बेंचमार्क कहा जाता है।
WTI उत्तरी अमेरिका के लिए एक मानदंड है और शिकागो तथा न्यूयॉर्क में एक्सचेंजों में इसकी ट्रेडिंग होती है।
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17 Apr
चलिए आपको ले चलता हूँ साल २०११ में, जब इंडिया अगेंस्ट करप्शन अपने चरम पर था।

ये सिलसिलेवार घटनाएं आप अंग्रेजी में @thakkar_sameet की पोस्ट में नीचे पढ़ सकते हैं जिसका मैं आप सभी के लिए हिंदी में अनुवाद लेकर आया हूँ ।
तो बात है २०११ की जब अंग्रेजी मीडिया समाज पर हावी हो रहा था। गोस्वामी  साहब टाइम्स नाउ संभाले हुए थे और नेरेटिव सेट करने में अग्रणी माने जाते थे।

एक रोज़ उसी माहौल में मियाँ जी, पटेल और चिद्दू मिलकर  पुरी, राघव और रॉय से मुलाकात करते हैं।
गोस्वामी नामक काँटा अब ज्यादा चुभ रहा था जिसको दूर करने का वक्त आ गया था मगर अफ़सोस, कि बहुत देर हो चुकी थी।

लोग सड़कों पर उतर चुके थे और कांग्रेसी इकोसिस्टम को इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती दी जा चुकी थी।
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11 Apr
बिजौली नाम था उस गांव का जहां हम पहली बार बचपन में गए थे।
झांसी के पास ही था और हमारे चाचा दादा जी वहां डाक्टरी करते थे।

पेड़ नीम का ही था घर के अंदर और घर के बाहर भी..
गरमी में दिन थे तो छत पर ही सोना होता था।
शाम को पानी छिड़क देते थे और फिर करीब ७ बजे गद्दा लगाकर ,चादर बिछा कर छोड़ दिया जाता था।

१० बजे के करीब जब ऊपर आते थे तो बिस्तर ठंडा मिलता था और मस्त एक घंटे अपने दादाजी से कहानी सुनकर सो जाते थे।
उस रात भी चाचा जी के साथ ऊपर आ गया था पर दादाजी अभी व्यस्त थे।
थोड़ी देर चाचा जी मस्ती करते रहे और फिर वो भी सो गए।
नीम के पेड़ पर उल्लुओं का भी एक जोड़ा रात भर आवाज़ें निकाला करता था।
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6 Apr
"दर्शक फिल्म की प्रशंसा में स्क्रीन पर सिक्कों, फूलों की पंखुड़ियों और चावल की बौछार कर रहे थे।
उन्होंने नंगे पैर सिनेमाघर में प्रवेश किया था.....
ऐसा लग रहा था जैसे किसी धार्मिक सभा का आयोजन किया गया है ....
लोगों ने बाहर एक छोटा मंदिर भी स्थापित कर डाला था। और तो और बांद्रा में, जहाँ पौराणिक फिल्में नहीं दिखाई जाती थीं, यह फिल्म पचास हफ्तों तक चलती थी।

यह एक चमत्कार था संतोषी माता का.....

—अनिता गुहा (अभिनेत्री जिन्होंने संतोषी मां का किरदार निभाया था)
बीते समय में हम सभी ने ये तो मान ही लिया है कि सिनेमा समाज का आइना होता है। हमारी फिल्मों में जो भी ,जैसा भी दिखाया जाता है वो समाज में होने वाली घटनाओं से जुड़ा हुआ ही दिखता है।
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4 Apr
और मै आपको पढ़वा देता हूं हिंदी में...

वक़्त निकालिएगा थोड़ा और तसल्ली से पढ़िएगा। आज के समय के हिसाब से बहुत उपयुक्त पोस्ट है और आप को सच में सोचने पर मजबूर करेगा।
डिस्क्लेमर : दोस्तों यह एक सिर्फ एक राजनीतिक पोस्ट नहीं है बल्कि उस से अधिक है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप राईट विंग के समर्थक हैं या लेफ्ट विंग के, आप इस पोस्ट को सिर्फ इसलिए पढ़िए कि आप इन सब से ऊपर एक इंसान भी हैं।
मैं मानता हूँ कि मैं किसी भी मामले में कोई विशेषज्ञ नहीं हूँ, लेकिन आज मैं अपने जीवन के कुछ अनुभवों, अपने विचारों, अपनी समझ को आपके साथ बाँटना चाहता हूँ।
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2 Apr
एक चिट्ठी मोदी जी के नाम.............
प्रिय प्रधान मंत्री महोदय,
आज मैं आपको कुछ बताना चाहता हूँ ।
कुछ कहना चाहता हूँ आपसे, आपको बताना चाहता हूँ कि वे आपको पसंद नहीं करते हैं ।
सच कहूँ, तब वे आपको कभी पसंद नहीं करते थे, लेकिन इस समय में जब हम अपने अस्तित्व के भयावह संकट से जूझ रहे हैं, जब हम सभी, भारत के हर एक नागरिक को, हमारी पूरी ताकत से आपका साथ देने की आवश्यकता है, तब भी वे आपको पसंद नहीं करते हैं।
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31 Mar
मूल रूप से ये लेख नताशा जी का है जिसको मैं सिर्फ हिंदी में अनुवाद कर रहा हूँ। मैं इनसे सहमत हूँ या नहीं ये ज़रूरी नहीं , ज़रूरी ये है कि आप इनको पढ़ें और अपनी राय स्वयं बनाएं।
उनका कहना है कि वो पहली बार अपने राजनीतिक विचार व्यक्त कर रही हैं क्यूंकि इस समय जीवन और मृत्यु की बात है और उन्हें लगता है कि इस से ज्यादा महत्वपूर्ण वक़्त और नहीं हो सकता था अपनी बात रखने का।
यदि आप पूरी बात पढ़ते हैं और फिर भी असहमत हैं तो कृपया यहाँ अपनी भद्दी टिप्पणी न करें। आप अपने विचार अपने पास रखें क्यूंकि बहस में संलग्न होने के लिए समय, ऊर्जा, मन-स्थान या इच्छा फिलहाल इस वक़्त नहीं है।
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29 Mar
सर्वप्रथम आभार,आभास भाई का जिन्होंने सिलसिलेवार तरीके से #China के #COVID19 प्रोपेगेंडा की धज्जियाँ उड़ाई हैं और @DrTedros की भूमिका को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

आप सभी के लिए प्रस्तुत है उस श्रुंखला का हिंदी अनुवाद,
तसल्ली से पढ़िए और समझिये #chinesevirus के खेल को
7 दिसंबर, 2018 को @guardian की यह रिपोर्ट बताती है कि चीन भारत के पत्रकारों को खरीदने के लिए बड़ा पैसा लगा रहा है।

theguardian.com/news/2018/dec/…

इसे आप #Prologue मान सकते हैं ।
अब आपको @WHO के बॉस @DrTedros के बारे कुछ जानकारी देता हूं। आपको रो अब पता ही होगा कि वह WHO के महानिदेशक (पीएचडी वाले डॉ।) हैं। उनको WHO का ये पद यह इथियोपिया के रहते हुए चीन के प्रति उनकी निष्ठा के लिए हुआ।

स्क्रीनशॉट को देखें ।
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28 Mar
प्रेम सागर रामानंद सागर के बेटे हैं। उन्होंने रामानंद सागर की बायोग्राफी ‘एन एपिक लाइफ : रामानंद सागर’ लिखी है। प्रेम ने इस बायोग्राफी में टीवी- फिल्म इंडस्ट्री और रामायण की मेकिंग से जुड़ी कई इंट्रेस्टिंग बातें बताई और कई राज़ खोले हैं।
वहीं से उड़ा कर लाया हूं कुछ खास बातें रामानंद सागर साहब की आपके लिए-

1976 की बात है, रामानंद अपने चार बेटों (सुभाष, मोती, प्रेम और आनंद) के साथ स्विट्जरलैंड में थे।‘चरस’ फिल्म की शूटिंग चल रही थी। शाम हुई, काम निपटा तो रामानंद बेटों के साथ एक कैफे में जा बैठे।
गलाने वाली सर्दी पड़ रही थी, रामानंद सागर ने रेड वाइन का जग ऑर्डर किया तो एक फ्रेंच सा दिखने वाला शख्स वाइन ले आया। उसने लकड़ी का एक रेक्टेंगल बॉक्स खिसकाकर उनके सामने रख दिया, जिसमें सामने की तरफ लकड़ी के दो पल्ले लगे थे।

उस आदमी ने दोनों पल्ले खिसकाए और स्विच ऑन किया...
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28 Mar
पिताजी हमारे एक चीज सिखाए थे , "बचत" और वो उस समय के मध्यम वर्ग की रीढ़ हुआ करती थी।

ये जो "नया खून" है ,
इसका मूल मंत्र हो गया था,

"जी लो जी भर के, कल हो ना हो"

वो पल आ गया है।
दण्ड हर किसी को भरना होगा।
हमे, आपको, सभी को..
अपनी जड़ों से कटने का मूल्य देना पड़ेगा।
पहली तनख्वाह आयी तो दूसरे दिन बैंक लेकर गए और ५०० रूप्ए की, साल भर की RD खुलवा दिए।
शाम को LIC वाले को बुला कर ६००० साल की मनीबैक दिलवा दिए पॉलिसी।
बोले RD से ७००० के ऊपर मिलेगा और उसके ६००० LIC को से देना।
बाकी की एफडी करवा देना।
मुझे याद है ९० के आसपास मेरे पास १५००, २५००, ३००० रुपए की एफडी हुआ करती थी जिनपर ब्याज करीब ११ % मिला करता था।

एलआईसी का पैसा जब मिला ५ साल बाद तो उसका फिर किसान विकास पत्र खरीद दिया।

उनका कहना था कि अपनी तनख्वाह का २०% बचाओ हर महीने कैसे भी और "आड़े वक़्त" के लिए बचा कर रखो।
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23 Mar
आजकल समय इतना है कि जिनसे कई दिनों से बातचीत नहीं हुई उनको भी याद किया जा रात है। कल रात्रि एक बुज़ुर्ग पारिवारिक सदस्य को फोन मिलाया तो एक रोचक बात कही उन्होंने।
सोचा आप सभी से बांट लेता हूं।
उनका कहना था कि हमारे शास्त्रों में यह उल्लेख है कि यदि हम किसी मंत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें उसी मंत्र का करीब लाख या हज़ार बार जाप करना होता है या मंत्र को सुनना होगा।
उनका कहना था कि मंत्रों का सामूहिक पाठ करने से या एक व्यक्ति द्वारा मंत्र को अनेक बार जाप करने मंत्र सिद्ध किया जाता है और उस मंत्र में उत्कृष्ट शक्ति होती है।
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21 Mar
पांच साल पहले बिल गेट्स ने एक टेड टॉक दिया था, जिसका नाम था "हम अगले महामारी के लिए तैयार नहीं हैं"

पढ़ते जाइए और बाकी सोचना काम आपका है...

बिल गेट्स का कहना था कि..
उन्होंने आगे चेतावनी दी थी कि "तैयारी और समन्वय के बिना, एक नए #कोरोनोवायरस में लाखों जीवन और खरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं"

उनकी चेतावनी थी -
"हमें तुरंत कुछ करना होगा क्यूंकि अब हमारे पास समय ज़्यादा  नहीं है।"
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17 Mar
मिथक # 1: #कोरोनावायरस ग्रीष्म ऋतु में खतम हो जाएंगे।

गलत- पिछली महामारियों ने मौसम मिजाज़ का कोई लिहाज नहीं किया था और इस बार जैसे ही गर्मियों का मौसम आयेगा, दक्षिणी गोलार्ध में सर्दी पड़ने लगेगी। ध्यान रखें यह वायरस वैश्विक है।
मिथक #2: गर्मियों में, मच्छर के काटने से यह वायरस अधिक फैल जाएगा।

गलत- यह संक्रमण आपके आस पास रह रहे लोगों की सांसों के द्वारा फैलाए गए छींटों से फैलता है, रक्त से नहीं। इसे मच्छर नहीं फैला सकते हैं।
मिथक #3: यदि आप बिना किसी असुविधा के दस सेकंड के लिए अपनी सांस रोक सकते हैं, तो आप #COVID2019 से संक्रमित नहीं है।

गलत: कोरोनावायरस वाले अधिकांश युवा रोगी 10 सेकंड से अधिक समय तक अपनी सांस रोक सकते हैं और बिना वायरस के भी कई बुजुर्ग ऐसा करने में सक्षम नहीं होंगे।
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