How to get URL link on X (Twitter) App
कभी माँ का ईलाज.. इन लोगों का गाहे-बगाहे तेल खत्म होता रहा.. घर की जिम्मेदारियों को इन्होंने लूना बन के अपने ऊपर लाद लिया.. जीवन की जद्दोजहद में कभी तेल होता तो बीवी को उसके बर्थडे पे रेस्टोरेंट ले गए, कभी तेल खत्म हुआ तो छेद वाली बनियान बदलने के लिए मुहूर्त निकलने लगा..
लेकिन ये कैसे निश्चित कर सकते हैं कि हमारी जरूरत है क्या है,और क्या नहीं, लेकिन हम यह निश्चित जरूर कर सकते हैं कि हमारी परिवार की जरूरत है क्या है?
महाराज ने आव देखा न ताव, कह दिया,गंगा जी में? खरगोश होगा,और क्या!