आज महान दिवस है, युगों युगों तक स्मरण रखे जाने वाला दिवस है। आज एक महायज्ञ के सम्पन्न होने का दिवस है। आज संघर्ष का, बलिदान का उत्सव मनाने का दिवस है। आज सत्य की विजय का दिवस है। आज विजय दिवस है 1000 साल के अत्याचारों के विरुद्ध। और आज उन (1/n) #RamMandir #RamMandirAyodhya
बलिदानियों को याद करने का भी दिवस है जो इस दिवस के लिए 5 शताब्दियों के इस प्रचंड संघर्ष में आहूत हो गए, उनके परिवार वालों को भी याद करने का दिवस है क्योंकि व्यक्ति केवल स्वयं शहीद नहीं होता, उसके परिवारवालों का प्रचंड बलिदान भी होता है। आज कोठारी बंधुओं (2/n)#AyodhyaBhoomipoojan
का दिवस है, आज उन सब का दिवस है जो बाबरी के अवैध ढांचे के ध्वंस में दब कर शहीद हो गए और उनकी लाशें तक नहीं मिली। आज आडवाणी जी का दिवस है, और उन सभी नेतृत्वकर्ताओं का दिवस है जिन्होंने इस आंदोलन को परिणीति तक पहुंचाया। आज विश्व की प्राचीनतम, समृद्धतम और सबसे (3/n) #Ayodhya
सहिष्णु धर्म और सभ्यता की विजय का दिवस है। आज ख़ुशी, उल्लास का दिवस है। आज पुण्य दिवस है।
किन्तु आज सब्र और संयम के साथ लक्ष्य प्राप्ति हेतु किये गए संघर्ष के विजय का दिवस ही नहीं है, पराजय का दिवस भी है- बाबर और उसकी कुत्सित बाबरी सोच की पराजय का। आज बाबर की विरासत (4/n)
को अपना मानने वालों के पराजय का दिवस है। आज धर्मान्धता की पराजय का दिवस है। आज किसी सोमनाथ की मूर्ति को विखंडित कर मक्का की सीढ़ियों में घिनौनी सोच के पराजय का दिन है। आज काफ़िर के नाम पर हिंसा करने वाले राक्षसों के पराजय का दिन है, जो ये मानते थे कि युद्ध में पराजित (5/n)
दूसरे धर्म के लोगों की स्त्रियों बेटियों का बलात्कार करने, और उन्हें अरब में ले जाकर sex slave बनाकर बेच देना धर्म युद्ध है, जिहाद है, अल्लाह का आदेश है। उन लोगों की पराजय का दिन है जो मानते थे कि वे एक सभ्यता को उसके पूजा स्थल गिरा कर, उसके पुस्तकालय जलाकर समाप्त कर (6/n)
सकते हैं। आज इस दुनिया के सबसे क्रूरतम, सबसे भयावहतम, सबसे ज्यादा जाहिलियत भरे धर्मोन्माद की पराजय का पुण्य दिवस है।
आज दिवस ये याद रखने का भी है कि शक्ति का असंतुलन सदैव किसी के पक्ष में नहीं रहता, निरंतर बदलता रहता है। और जब एक सभ्यता सभी अत्याचारों को झेलकर भी अपना (7/n)
समृद्ध पावन इतिहास भूलने से इनकार कर दे, और अपनी पीढ़ियाँ बलिदान करने को तैयार हो जाये, तो फिर कोई उसे उसका लक्ष्य प्राप्त करने से रोक नहीं सकता, कोई उसे न्याय प्राप्त करने से रोक नहीं सकता, चाहे कोटिशः बाधाएं मार्ग अवरुध्द किये खड़ी हों। बाकी जिस देश में ईश्वर को न्याय (8/n)
पाने में 500 साल लग जायें, उन्हें उनके ही भूमि पर टेंट में रहना पड़ जाए, जिस देश के भीतर उनके अस्तित्व को ही नकारने वाले हों, वहाँ आम आदमी को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़े तो क्या खास है, महत्वपूर्ण भी ये तो है की न्याय मिला, अंततः, जाने कितनी क़ीमत चुकाने के बाद ही सही। (9/9)
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