छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी पेशवाओं ने उनकी विरासत को बड़ी सावधानी से सँभाला। अंग्रेजों ने उनका प्रभुत्व समाप्त कर पेशवा बाजीराव द्वितीय को 8 लाख वार्षिक पेंशन देकर कानपुर के पास बिठूर मे नजरबन्द कर दिया।
इनके दरबारी धर्माध्यक्ष रघुनाथ पाण्डुरंग भी इनके साथ बिठूर आ गये। इन्हीं रघुनाथ जी के आठ पुत्रों में से एक का नाम तात्या टोपे था।
1857 में जब स्वाधीनता की ज्वाला धधकी, तो नाना साहब के साथ तात्या भी इस यज्ञ में कूद पड़े। बिठूर, कानपुर, कालपी और ग्वालियर में तात्या ने...
देशभक्त सैनिकों की अनेक टुकडि़यों को संगठित किया। कानपुर में अंग्रेज अधिकारी विडनहम तैनात था। तात्या ने अचानक हमला कर कानपुर पर कब्जा कर लिया। यह देखकर अंग्रेजों ने नागपुर, महू तथा लखनऊ की छावनियों से सेना बुला ली। अतः तात्या को कानपुर और कालपी से पीछे हटना पड़ा।
इसी बीच रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी में संघर्ष का बिगुल बजा दिया। तात्या ने उनके साथ मिलकर ग्वालियर पर अधिकार कर लिया। तात्या २ वर्ष तक सतत अंग्रेजों से संघर्ष करते रहे। चम्बल से नर्मदा के इस पार तक तथा अलवर से झालावाड़ तक तात्या की तलवार अंग्रेजों से लोहा लेती रही। इस युद्ध में...
तात्या के विश्वस्त साथी एक-एक कर बलिदान होते गये।
अकेले होने के बाद भी वीर तात्या टोपे ने धैर्य और साहस नहीं खोया। तात्या केवल सैनिक ही नहीं, एक कुशल योजनाकार भी थे। उन्होंने झालरा पाटन की सारी सेना को अपने पक्ष में कर वहाँ से 15 लाख रुपया तथा 35 तोपें अपने अधिकार में ले लीं।
इससे घबराकर अंग्रेजों ने 6 सेनापतियों को एक साथ भेजा; पर तात्या उनकी घेरेबन्दी तोड़कर नागपुर पहुँच गये। अब उनके पास सेना बहुत कम रह गयी थी। नागपुर से वापसी में खरगौन में अंग्रेजों से फिर भिड़न्त हुई। 7 अप्रैल, 1859 को किसी के बताने पर पाटन के जंगलों में उन्हें शासन ने दबोच लिया।
ग्वालियर (म.प्र.) के पास शिवपुरी के न्यायालय में एक नाटक रचा गया, जिसका परिणाम पहले से ही निश्चित था।
सरकारी पक्ष ने जब उन्हें गद्दार कहा, तो तात्या टोपे ने उच्च स्वर में कहा, ‘‘मैं कभी अंग्रेजों की प्रजा या नौकर नहीं रहा, तो मैं गद्दार कैसे हुआ ? मैं पेशवाओं का सेवक रहा हूं।...
जब उन्होंने युद्ध छेड़ा, तो मैंने एक पक्के सेवक की तरह उनका साथ दिया। मुझे अंग्रेजों के न्याय में विश्वास नहीं है। या तो मुझे छोड़ दें या फिर युद्धबन्दी की तरह तोप से उड़ा दें।’’
अन्ततः 17 अप्रैल 1859 को उन्हें एक पेड़ पर फाँसी दे दी गयी।
कई इतिहासकारों का मत है, कि...
तात्या कभी पकड़े ही नहीं गये। जिसे फाँसी दी गयी, वह नारायणराव भागवत थे, जो तात्या को बचाने हेतु स्वयं फांसी चढ़ गये। तात्या संन्यासी वेष में कई बार अपने पूर्वजों के स्थान येवला आये।
इतिहासकार श्रीनिवास बालासाहब हर्डीकर की पुस्तक ‘तात्या टोपे’ के अनुसार...
तात्या 1861 में काशी के खर्डेकर परिवार में अपनी चचेरी बहिन दुर्गाबाई के विवाह में आए थे,तथा 1862 में अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी उपस्थित थे। तात्या के एक वंशज पराग टोपे की पुस्तक ‘तात्या टोपेज आपरेशन रेड लोटस’ के अनुसार कोटा एवं शिवपुरी के बीच चिप्पा बरोड के युद्ध में..
1 जनवरी, 1859 को तात्या ने वीरगति प्राप्त की।
अनेक ब्रिटिश अधिकारियों के पत्रों में यह लिखा है कि कथित फांसी के बाद भी वे रामसिंह, जीलसिंह, रावसिंह जैसे नामों से घूमते मिले हैं। स्पष्ट है, कि इस बारे में अभी बहुत शोध की आवश्यकता है।
शत शत नमन 💐💐💐
बन्दे मातरम 🚩
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#मोदी_है_तो_मुमकिन_है
भगोड़े हीरा काराबोरी #नीरव_मोदी को भारत लाए जाने का रास्ता साफ हो गया ..
भारत की प्रत्यर्पण की मांग पर ब्रिटेन की गृह मंत्री ने सहमति जताई है और मंजूरी दे दी। सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को ब्रिटेन की होम मिनिस्टर प्रीति पटेल ने नीरव मोदी को..
भारत प्रत्यर्पण करने के फैसले पर मुहर लगा दी है। इससे पहले लंदन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण पर सहमति जताई थी और उसकी सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा था कि उसका भारत की जेल में ख्याल रखा जाएगा।
नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर...
पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर 14 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक के लोन की धोखाधड़ी का आरोप है। यह धोखाधड़ी गारंटी पत्र के जरिए की गई। उस पर भारत में बैंक घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दो प्रमुख मामले सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किए है।
🟤 बहुत से हिन्दू वामपंथियो के षड़यंत्र मे फसकर मन्दिरो पर, #राममंदिर पर ज्ञान दे रहे है और अस्पताल अधिक होने की बात कर रहे है। इन्हें बस बहाना चाहिए हिन्दू आस्था पर आक्रमण करने के लिए। इन्हें क्या ज्ञान नही है कि कोरोना वायरस वामपंथी देश चीन ने फैलाया था?
🟣 पिछले वर्ष से ही सरकारी नियंत्रण में होने और सरकारो को टैक्स देने के बाद भी मंदिरों ने करोड़ो का दान दिया। आज जब रोगियों की संख्या बढ़ गयी है, तो यही मंदिर और आश्रम बेड भी मुहैया करवा रहे है।
🔵 अस्पताल तो इटली, ब्राज़ील और अमरीका मे भी बहुत है। वहाँ क्यों हाहाकार मचा हुआ है?
🟢 ऐसी पोस्ट डालनेवालों की बौद्धिक मूर्खता का पता चल रहा है...
हम #राममन्दिर के लिए लड़े थे...हम लड़े थे अपने #स्वाभिमान के लिए...
हमने किसी की मान्यताओं को कभी अतिक्रमित नहीं किया...जो हमारा था बस वह लिया, संघर्ष करके...
और यदि वहां एक अस्पताल बन भी जाता, तो...
अल्पसंख्यक (मुसलमान-ईसाई) उन्मुख भारत का संविधान और सभी राजनीतिक दलों की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति...
राष्ट्रवादी हिन्दुओं के लिए घोर संकट की घंटियां जोर-जोर से बज रही है, किन्तु हिन्दू राष्ट्रवादी स्वयं बिखरे और भटके हुए है। वे रो रहे है, चिल्ला रहे है, पर..
यह नहीं जानते कि क्या करे, कहाँ से शुरू करे?
यह समझना आवश्यक है, कि हिंदुओं के सामने आज जैसी संकट की घड़ी इतिहास में कभी नहीं आई। मध्ययुग में राजाओं और सुल्तानों के बीच युद्ध होते थे, किन्तु आज हमारे सामने संविधान प्रदत्त एक नए प्रकार का युद्ध, विरोधी सभ्यताओं व...
जीवन मूल्यों के टकराव का है।
इसलिए हिन्दू जन-जागरण और सामूहिक प्रयत्न के बिना दिनों-दिन बढ़ते जा रहे इस्लामी आक्रमण से पार पाना अत्यंत कठिन है। विशेषकर इसलिये, कि कम्युनिस्ट और सैक्यूलरवादी हिन्दू भी साम्राज्यवादी इस्लाम के संरक्षक और समर्थक है।
*3* जिस सम्राट का राजचिंह राष्ट्रीय प्रतीक मानकर सरकार चलता है और उनका मंत्र सत्यमेव जयते को अपनाया गया...
*4* जिस देश में सेना का सबसे बड़ा युद्धसम्मान सम्राट अशोक के नाम पर अशोक चक्र दिया जाता है...
*5* जिस सम्राट से पहले या बाद में कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नही हुआ, जिसने..
अखंड भारत (आज का नेपाल, बांग्लादेश, पूरा भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान) जितने बड़े भूभाग पर एक-छत्र राज किया हो...
*6* सम्राट अशोक के ही समय में 23 विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई, जिसमें तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला, कंधार आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे। @Bhgwa2020@ApJain9
कुछ लोग कुतर्क के रास्ते से राष्ट्रहितैषी लोगों का मार्ग भटकाने का प्रयास कर रहे है, ये कहकर कि मंदिरों की जगह अस्पताल बनवाये होते तो लोग कोरोना से मरते न होते।
उन्हें सीधे शब्दों में समझाती हूं कि भारत में अस्पताल भी बहुत हैं, चिकित्सा विशेषज्ञ भी बहुत हैं..
बस कुछ कमी है तो चिकित्सकीय सुविधाओं की। वो इस लिए कम है, कि भारत से अभी भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ है। आज भी सरकार बजट में चिकित्सा क्षेत्र के लिए काफी अनुदान देती है, लेकिन संबंधित विभाग उन पैसों का 25% भाग अस्पतालों में लगाते है। बाकी सब आपस में मिलबांट लेते है, जैसे कि...
ये उनके पिता की सम्पत्ति का है।
जिन्हें देश में अस्पताल कम लगते है, तो उनको जानना जरूरी है कि हिंदुओं की जनसंख्या के लिए इतने अस्पताल बहुत है। वे जरा उनसे कहें जो देश में अंधाधुंध आबादी बढ़ाकर देश में मिल रही समस्त सुविधाओं को मात्र एक वोट की कीमत से बसूल रहे है।