गीता (३।३६) में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि मनुष्य न चाहते हुए भी कौन-सी शक्ति से प्रेरित होकर अनुचित कार्य कर बैठता है?

अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुष:।
अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजित:।।
भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया–पाप होने का कारण कामना है। भोग भोगने की कामना, पदार्थों के संग्रह की कामना, रुपया, मान-बड़ाई, नीरोगता, आराम आदि की चाहना ही सम्पूर्ण पापों और दु:खों की जड़ है।
रामचरितमानस (सुन्दरकाण्ड, ३८) में गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं

काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ
सब परिहरि रघुबीरहि भजहूँ भजहिं जेहि संत

काम, क्रोध व लोभ हैं पाप का कारण स्त्री-पुत्र आदि भोगों की कामना का नाम ‘काम है इसी कामना के वश होकर मनुष्य चोरी, व्यभिचार आदि पाप करता है।
मन के विपरीत होने पर जो उत्तेजना उत्पन्न होती है उसे ‘क्रोध’ कहते हैं। क्रोधवश भी मनुष्य हिंसा आदि पाप करता है।

धन आदि की बहुत अधिक लालसा को ‘लोभ’ कहते हैं। लोभ केवल धन का ही नहीं होता वरन् संग्रह करने की आदत भी लोभ का परिणाम है। इसके कारण मनुष्य झूठ, कपट, चोरी, विश्वासघात आदि
पाप करता है। इसलिए इन तीन दोषों को ‘आत्मा का नाश करने वाला’ व ‘पाप का बाप’ कहा गया है।

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More from @vishal_shrotriy

24 Dec
स्वर्ग लोक का वर्णन अर्जुन द्वारा देखा गया / वह अपने मूल भौतिक रूप में स्वर्ग जाने और उसी रूप में वापस आने वाले व्यक्तियों में से एक थे ! Image
शिव ने पाशुपतास्त्र का उपहार दिया और इंद्र ने अन्य दिव्य हथियार / अर्जुन ने निवात कवच राक्षसों को हराया और पौलम और कालकेय के पुत्र की कहानी तो चलिए सुरु करते है
युधिष्ठिर, द्रौपदी और अन्य लोग गंधमदन पर्वत पर अर्जुन के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। एक अच्छी सुबह उन्होंने अपने ऊपर एक तेज़ गड़गड़ाहट की आवाज़ सुनी और देखा कि एक हरे रंग का सुंदर रथ आसमान से नीचे आ रहा है। हर कोई जानता था कि आने वाला कौन था।
Read 16 tweets
24 Dec
सोमरस कोई मदरा शराब नही है

सनातन धर्म में सोमरस का आशय मदिरा नही है ना ही सोमरस नशीला पदार्थ है,,,

"देवता शराब नही पीते थे"

सोमरस सोम के पौधे से प्राप्त था , आज सोम का पौधा लगभग विलुप्त है , Image
शराब पीने को सुरापान कहा जाता था , सुरापान असुर करते थे , ऋग्वेद में सुरापान को घृणा के तौर पर देखा गया है ,

टीवी सीरियल्स ने भगवान इंद्र को अप्सराओं से घिरा दिखाया जाता है और वो सब सोमरस पीते रहते हैं , जिसे सामान्य जनता शराब समझती है
सोमरस , सोम नाम की जड़ीबूटी थी जिसमे दूध और दही मिलाकर ग्रहण किया जाता था , इससे व्यक्ति बलशाली और बुद्धिमान बनता था ,

जब यज्ञ होते थे तो सबसे पहले अग्नि को आहुति सोमरस से दी जाती थी ,

ऋग्वेद में सोमरस पान के लिए अग्नि और इंद्र का सैकड़ो बार आह्वान किया गया है ,
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22 Dec
शिव और ब्रह्मा दोनों के संताने हैं। भगवान विष्णु की कोई संतान क्यों नहीं है?
उत्तर भगवद गीता में है

अध्याय 14.3

मम योनिर्महद् ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् |
सम्भव: सर्वभूतानां ततो भवति भारत || 3||
सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तय: सम्भवन्ति या: |
तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रद: पिता || 4||

अनुवाद:
कुल भौतिक पदार्थ, प्राकृत, गर्भ है। मैं इसे व्यक्तिगत आत्माओं के साथ संस्कारित करता हूं, और इस प्रकार सभी जीवित प्राणी पैदा होते हैं। हे कुंती पुत्र, जीवन की सभी प्रजातियों के लिए जो उत्पन्न होती हैं, भौतिक प्रकृति गर्भ है, और मैं बीज देने वाला पिता हूं।
Read 4 tweets
21 Dec
भगवान शिव के दस प्रसिद्ध अवतार

हम सभी दशावतार या भगवान विष्णु के 10 अवतारों से परिचित हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव के भी अवतार हैं? दरअसल, भगवान शिव के 19 अवतार हैं। अवतार पृथ्वी पर मानव रूप में एक देवता का जानबूझकर अवतरण है। आमतौर पर, अवतार का मुख्य उद्देश्य बुराई
को नष्ट करना और मनुष्यों के लिए जीवन को आसान बनाना है।

भगवान शिव की बात करें तो हम में से बहुत कम लोग उनके 19 अवतारों के बारे में जानते हैं। भगवान शिव के हर अवतार का एक विशेष महत्व है।
भगवान शिव के 19 अवतारों में से प्रत्येक का एक विशिष्ट उद्देश्य और मानव जाति के कल्याण का अंतिम उद्देश्य था यहां भगवान शिव के 9 सबसे प्रसिद्ध अवतार हैं

पिपलाद अवतार

भगवान शिव ने पिपलाद केरूप में ऋषि दधीचि के घर जन्म लिया लेकिन पिपलाद के जन्म से पहले ही ऋषि ने अपना घर छोड़ दिया
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27 Nov
*प्रभु की प्राप्ति किसे होती है..?*

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एक सुन्दर कहानी है :--
एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव की बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था।
एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा -- "राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। बोलो तुम्हारी कोई इछा हॆ?"

प्रजा को चाहने वाला राजा बोला -- "भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ हैं आपकी कृपा से राज्य मे सब प्रकार सुख-शान्ति है।
फिर भी मेरी एक ही ईच्छा हैं कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी कृपा कर दर्शन दीजिये।"
"यह तो सम्भव नहीं है" -- ऐसा कहते हुए भगवान ने राजा को समझाया। परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से जिद्द् करने लगा।
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4 Sep
बकासुर और भीम की कहानी।

पांडवों के सुरक्षित और गुप्त रूप से लक्षग्रह प्रकरण से बचने के बाद, ऋषि व्यास उनसे मिलने आए। वह उन्हें एक चक्र नगर ले गया और एक ब्राह्मण के घर में रख दिया।

पांचों भाई दान मांगते थे, और पालन पोषण करते थे
उन्होंने जो कुछ भी एकत्र किया था, उसके माध्यम से। उसका एक बड़ा हिस्सा भीम के लिए उनकी विशाल भूख के कारण आरक्षित किया जाएगा। एक दिन भीम को छोड़कर सभी भाई अपनी दिनचर्या के लिए निकल पड़े।
वह और कुंती पीछे छूट गए थे?
उन्होंने घरों के ब्राह्मणों की ओर से एक जोर से रोने की आवाज सुनी। कुंती परेशान थी क्योंकि वह इस रोने का कारण जानना चाहती थी। अचानक उसने सुना कि ब्राह्मण अपनी पत्नी को सांत्वना दे रहा है और उसकी आसन्न मृत्यु के बारे में बात कर रहा है।
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