उत्तरप्रदेश : आप "भारत भाग्य विधाता" बन सकते है..किसानों और सोशल मीडिया ने BPCL की बिक्री रोक दी है..धमाकेदार खबर है..

★★ मोदी ने मार्च 2022 तक BPCL को बेचने का फैसला किया था..3 खरीदारों ने "EOI" यानी "एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट" की चिट्ठी दे कर BPCL की नीलामी
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में भाग लेने की घोषणा भी की थी..

★★ पर अब,ये तीनों खरीदार BPCLके लिए बोली नही लगा रहे है..इन तीनों ने BPCLके लिए बोली लगाने से मना कर दिया है..ये किसान आंदोलन और सोशल मीडिया पर चल रहे लगातार कैंपेन का ही नतीजा है..

◆ अब BPCLको बेचने के लिए फिर से पूरी प्रक्रिया की शुरुआत
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करनी पड़ेगी..इसमे 2-3 साल का वक्त लगेगा..यानी 80% सम्भावना है कि 2024 तक BPCLनही बिक सकती

मैंने बारबार लिखा : जो BPCL खरीदेगा और जो BPCL बेचेगा उसकी 7पुश्ते जेल में सड़ेगी..मोदी को शायद ये बात समझ आ गई..उत्तरप्रदेश : वोट की चोट कीजिए..देश आपका कर्जदार रहेगा..
3/3
@BramhRakshas
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Feb 12
एक रामायण कालीन कथा सुनीथी जो आज याद आगई🙏

ब्रह्म मुहूर्तमें पंडित जी सरयू स्नान के लिए जा रहे थे और रास्ते में एक श्वान(कुत्ता)लेटा हुआ था।

अचानक पंडितजी को क्रोध आया और उन्होंने कुत्तेको छड़ी मार दी,कुत्ता राम जी के दरबारमें शिकायत लेकर पहुंच गया।

बेशक पंडितजी दोषी पाएगए
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लेकिन उन्हें क्या सजादी जाए और कौनदे इसे लेकर दिक्कत महसूस हुई।अंततः कुत्ते से निवेदन किया गया कि वो ही सजा मुकर्रर करदे।

कुत्ते ने निवेदन किया कि पंडित जी को फलाने मठ का मठाधीश बनादो!

भरतजी को और संशय हुआ और उन्होंने श्वान महाराजसे विनंती करतेहुए पूछा कि ये महानुभाव ये आप दंड
दे रहे हैं या पुरुस्कार ?

कुत्ते ने विनम्रता से उत्तर देते हुए बताया कि प्रभु पहले मै भी उसी मठ का महन्त था लेकिन जमीनों में घोटाले,चंदा चोरी तथा असत्य वचन के कारण इस दुर्गति को प्राप्त हुआ हूं🙏

इन चित्रों का इस कथा से कोई सम्बन्ध नहीं है 🙏

जय जय शियाराम🎉
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@BramhRakshas
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Feb 10
जुप्पी वालों,आज थोड़ी बायलॉजी पढ़ के जाओ।

फोटुक देखो,और इसे पहचानो,एशियन बीटल कहते हैं।फसल चट कर जाने वाले नारंगी कीड़े..जिनकी उत्पत्ति नागपुर के आसपास की बताई जाती है।पर अब ये सर्वत्र बुरी तरह से फैल गए हैं।
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ये आसानी से पहचाने जा सकते हैं। मोटा पेट, पिचका थूथन, चटक नारंगी
बदन पर गन्दे काले धब्बे होते हैं।लेकिन केसरिया रंग के धार्मिक महत्व से भ्रमित कुछ लोग इन्हें बड़ा सुंदर और क्यूट कीड़ा समझतेहैं।

इसमे कोई सचाई नही।दरअसल इनसे दूर रहने में भलाई है,क्योकि अगर छू भी लिया,तो बड़ी तेज बदबू आती है।ये बदबू पांच साल तक,हाथको फिनाइल में डुबाये रखने पर
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भी नही जाती।यह अनुभव, हालांकि आपको हो ही चुका है।

मितरों,खास बात ये है कि इनकी एक पूरी फैमली है,नारंगी परिवार ..जो दरअसल होते एक ही ब्रीड हैं,मगर अलग अलग होने का स्वांग करतेहै।ये झुंड में रहते हैं।जहां कुछ हरियाली दिखी,चट कर जाते हैं।

जुप्पी वालों,ये दरारोंमें अंडे देते हैं।
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Feb 8
भारतके इतिहास में नरेंद्र दामोदरदास मोदीके अलावा दूसरा कोई प्रधानमंत्री नहीं मिलेगा, जिसने अपने पदकी गरिमाको रोज़ झूठ, फ़रेब,पाखंडसे नीचे गिराया हो।

उनका विरोध सिर्फ़ इसलिए नहींहै कि वे आरएसएसकी नफ़रत वाली राजनीतिक विचारधाराके हैं।उनका विरोध अधिकांश इसलिए है,क्योंकि वे देश के
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लोकतंत्र,संविधान और संघीय ढांचेके प्रति अपनी संवैधानिक जवाबदेही को स्वीकार नहीं करते।

मोदी ने कल संसदमें इसे अंधविरोध बताया,जो असलमें उनकी ही उस मानसिक कुंठा की उपज है कि उनके पास विरोधियों के सवालों का तर्कपूर्ण जवाब नहींहै।

उनके चापलूस अंधभक्त है, जिनके पास भी उन्हीं की तरह
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ग़लतको ग़लत कहनेकी हिम्मत और काबिलियत नहीं है।ये सभी कल प्रधानमंत्रीके झूठे पुलिंदोंपर बेंच ठोक रहे थे,बेशर्मी से हंस रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कल कहा कि अन्धविरोधियों को सिर्फ़ मोदी ही दिखते हैं-दिन-रात। ठीक कहा। सरकार के टुकड़ोंपर पल रही मीडिया और बीजेपी ITसेल यही दिखाते हैं।
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Read 13 tweets
Feb 7
मैं अपने देश के प्रधानमंत्री से अर्थव्यवस्था, रोज़गार,नौकरी,ग़रीबी,शिक्षा,स्वास्थ्य जैसे किसी भी मुद्दे पर जवाब की उम्मीद नहीं करता।

क्योंकि, हमारे प्रधानमंत्री में जवाब देने की उतनी ही योग्यता है, जितनी बीजेपी IT सेल के 2 रुपये वाले ट्रोल की।

भारत के प्रधानमंत्री की योग्यता
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झूठ बोलने,ऊंची फेंकने,अश्लील फब्तियां कसने,धमकी देने,मुद्दों से भटकाने..जैसी बहुत सी हैं,जो मेरे लिए किसी काम की नहीं।

फिर देश की140करोड़ जनता ऐसे व्यक्तिको 2024तक भी क्यों झेले,जिसके पास इस देशको आगे लेजाने का कोई रोडमैप ही नहीं?

आज लोकसभा में यही प्रधानमंत्री राष्ट्रपतिके
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अभिभाषण पर170संशोधनों को रद्दी में फ़ेंककर सियासी रोटी सेंक रहे हैं।

इन सबके बावजूद कि देश आज अफ़ग़ानिस्तान बनने की कगारपर खड़ा है,जहां महिलाएं अपने भूखे बच्चोंके लिए रोटी मांगने सड़कोंपर हैं।

भारतके पीएम जब लोकसभामें भाषण दे रहे हैं, उन्हें पिछले साल आये सिडबी के सर्वे को
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Read 14 tweets
Feb 6
आज भारत के प्रधानमंत्री वर्चुअल रैली कर रहे थे। बातें वही- शिक्षा, स्वास्थ्य, 5 किलो अनाज और भिकास जैसे।

लेकिन प्रधानमंत्री खुद यह छिपा गए कि इन सब कल्याणकारी उपकारों के लिए उनकी ही सरकार सेस यानी उपकर वसूल रही है।

और इस बार तो अति हो गई, जब मोदीजी की "न खाऊंगा" सरकार ने
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इस सेस से जुटाई रकम में से भी 75000 करोड़ रुपये डकार लिए।

राम मंदिर का चंदा डकारने वालों से आप ईमानदारी की उम्मीद करते हैं?

साल 2004-05 में UPA सरकार बिना सेस के शिक्षा पर जीडीपी का 2.3% खर्च कर रही थी। 2022-23 में यह 1.1% हो गया।

2018 में जब मोदी सरकार ने स्वास्थ्य पर
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सेस लगाया था, तब सरकारी खर्च 2.2% था, इस बजट में 1.6% है।

2020-21 में खाद्य सहायता राशि 2 लाख 10 हज़ार 929 करोड़ रुपए थी, जो 2022-23 में 1,45,920 करोड़ रह गई है।

मोदी ने सिर्फ़ चुनाव जीतने के लिए पीएम ग़रीब कल्याण योजना में 80 करोड़ ग़रीबों को मुफ़्त राशन जारी रखा है।
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Feb 6
लोग कहते हैं कि डेटा से क्या होता है ?....दरअसल वे नहीं जानते कि इक्कीसवीं सदी मे डेटा ही अब किसी भी प्रोडक्ट महंगे सस्ते होने का निर्धारण कर रहा है !........

दो दिन पहले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने भारत की टायर बनाने वाली पांच बड़ी कंपनियों कुल 1788 करोड़ रुपये का
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जुर्माना लगाया हैं देश में90प्रतिशत टायर यही पांच कंपनियां बेचतीहैं।...CCIने अपोलो टायर्स पर425.53करोड़ रुपये,MRलिमिटेड पर622.09करोड़ रुपये,CEATलिमिटेड पर 252.16करोड़ रुपये,JKटायर पर309.95 करोड़ रुपये और बिड़ला टायर्स पर178.33 करोड़ रुपये का जुर्माना लगायाहै।

अब आप पूछेंगेके 2
इसका डेटा के साथ क्या संबंध है तो जान लीजिए इन्होंने किया क्या है?

इन टायर कंपनियों ने एक कार्टेल का निर्माण किया इस कार्टेल ने टायरों की कीमतें महंगी रखनेके लिए उत्पादन सीमित और नियंत्रित रखा।बाजारमें आपूर्ति को भी नियंत्रित किया। यह सब उन्होंने एक दूसरे के डेटाकी मददसे किया
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