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#राजस्थान_दिवस
फ़िल्म बॉर्डर में जब सुनील शेट्टी बोलते हैं ,ये मिट्टी बंजर है तो क्या हुआ इस माँ ने शेर पैदा किए हैं,
जब एक विदेशी लेखक इस धरती पे कदम रखने से पहले इस धरती का वंदन करके बोलता है कि ..

#Thread
मुझे इस धरती पे कदम रखने से डर लगता है पता नही कहां किसी वीर का शव ज़मीन में हो, ये उस माँ का अपमान होगा जिन्होंने ऐसे शेर पैदा किए अगर मेरे चरण उन्हें लग गए तो ।

मैं सुदूर थार मरुस्थल इलाके से आता हूँ ।
हमारे पास बंजर मिट्टी है ,पानी की कमी है ।
तो क्या हुआ हमारे पास शेरो की कोई कमी नहीं है ।

एक राजा जब उसको अपने दुश्मनों को हराना होता है तो वो आने मंत्री को बोलता है जाकर संपर्क कीजिए राजस्थान के योद्धाओं का ये जंग हमे वही जीत कर दे सकते है ।
गर्व है मैं ऐसी धरा से हूँ जहां एक समाज (गाड़िया लुहार) अपने राजा के दुर्ग छोड़ देने के बाद उनके साथ जंगल मे रहता है,और बना कर देता है तलवारे की राजन जाओ युद्ध करो और दुश्मन को बताओ केसरिया तलवारे क्या होती है ।
गर्व है मुझे इस धरा का जहां एक सिसोदिया कुल क़ई रानी अपने सेनापति का तिलक करके बोलती है कि जाओ मेवाड़ की शान लहरा कर आओ ।
वो सेनापति भी ऐसा शीश कट गया लेकिन फिर भी दुश्मन से लड़ता रहा ।

हमारे यहां कवि है "कुमार शिव" उन्होने क्या खूब कहां है-
उस सेनापति की शान में
"वो जब रणभूमि में उतरते थे ,
वो ऐसे योद्धा थे जिनके धड़ लड़ते थे"।

गर्व ही मुझे उस माँ पे जिसने अपने पेट जने बच्चे को दुश्मन को सौप दिया कि इसको मार दो क्योंकि उसको युवराज की जान बचानी थी ।
ना जाने अब तक कितनी ही "ऋतम्भराओ ने अपने रणविजय इस धरती की रक्षा के लिए इस समर में पुण्यवेदी को दे दिए " ।
ना जाने कितनी सुहागनों ने अपने सिंदूर पोछ दिए इस धरा की रक्षा के लिए ।
परमपराक्रमी पूज्य बप्पा रावल से लेकर वीरवर महाराणा प्रताप तक की इस महान वीरता की परम्परा को उत्पन्न करनेहारी धरती को आज विशेष प्रणाम करने का दिन है। स्वाभिमान का परमप्रतीक बनना और बनकर जीना किसे कहते हैं यह हमें राजस्थान ही की पूज्य भूमि से सीखने मिलता है।
मेरी नजर में 12 गांव है राजस्थान में (ज्यादा भी हो सकते है) जहाँ आज भी हर घर से बच्चा सेना में जाता हैं
जहां माँ तिलक लगा कर बच्चे को बोलती हैं जाओ नोच लेना उस गन्दी नजर को जो तुम्हारी माँ पे गलत नजर डाले ।
जहां एक पिता बेटे का सरहद से सकुशल लौटने के इंतज़ार में बूढ़ा हो जाता है
अंत मे बस इतना ये धरती बलिदान, त्याग और सेवा की है,यहां हर बच्चे के अंदर देश प्रेम का भाव है ।

पंडित नरेंद्र मिश्र क्या खूब लिखे है-
"दुहराता हूँ सुनो रक्त से लिखी हुई क़ुर्बानी,
जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी" ❤️

खमाघणी ।🙏
एक बार जरूर पधारो सा ।🙏
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