जन्मना जायते शूद्र: कर्मणा द्विज उच्यते।
अर्थात्
जन्म से सभी शूद्र होते हैं और कर्म से ही वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र बनते हैं।
अत: वेदों की भांति मनुस्मृति में भी वर्ण व्यवस्था पर जोर दिया गया है न कि जाति व्यवस्था पर।
@Real_Vishal_
#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
शूद्रो ब्राह्मणतामेति ब्राह्मणश्चैति शूद्रताम।
क्षत्रियाज्जातमेवं तु विद्याद्वैश्यात्तथैव च। (10/65)
कर्म के अनुसार ब्राह्मण शूद्रता को प्राप्त हो जाता है और शूद्र ब्राह्मणत्व को। इसी प्रकार क्षत्रिय और वैश्य से उत्पन्न संतान भी अन्य वर्णों को प्राप्त हो जाया करती हैं।
सनातन धर्म कर्माधारित था न कि जन्माधारित
1- ऐतरेय ऋषि दास अथवा अपराधी के पुत्र थे | परन्तु उच्च कोटि के ब्राह्मण बने और उन्होंने ऐतरेय ब्राह्मण और ऐतरेय उपनिषद की रचना की | ऋग्वेद को समझने के लिए ऐतरेय ब्राह्मण अतिशय आवश्यक माना जाता है |
#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
2- ऐलूष ऋषि दासी पुत्र थे | जुआरी और हीन चरित्र भी थे | परन्तु बाद में उन्होंने अध्ययन किया और ऋग्वेद पर अनुसन्धान करके अनेक अविष्कार किये |ऋषियों ने उन्हें आमंत्रित कर के आचार्य पद पर आसीन  किया | (ऐतरेय ब्राह्मण २.१९)

#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
3- सत्यकाम जाबाल गणिका (वेश्या) के पुत्र थे परन्तु वे ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुए।
4- राजा दक्ष के पुत्र पृषध शूद्र हो गए थे, प्रायश्चित स्वरुप तपस्या करके उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया | (विष्णु पुराण ४.१.१४)

#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
5-राजा नेदिष्ट के पुत्र नाभाग वैश्य हुए | पुनः इनके कई पुत्रों ने क्षत्रिय वर्ण अपनाया | (विष्णु पुराण ४.१.१३)

6- धृष्ट नाभाग के पुत्र थे परन्तु ब्राह्मण हुए और उनके पुत्र ने क्षत्रिय वर्ण अपनाया | (विष्णु पुराण ४.२.२)

#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
7-क्षत्रियकुल में जन्में शौनक ने ब्राह्मणत्व प्राप्त किया | (विष्णु पुराण ४.८.१) वायु, विष्णु और हरिवंश पुराण कहते हैं कि शौनक ऋषि के पुत्र कर्म भेद से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण के हुए| इसी प्रकार गृत्समद, गृत्समति और वीतहव्य के उदाहरण हैं
#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
8-मातंग चांडालपुत्र से ब्राह्मण बने |
9- ऋषि पुलस्त्य का पौत्र रावण अपने कर्मों से राक्षस बना |
10-राजा रघु का पुत्र प्रवृद्ध राक्षस हुआ |
11- त्रिशंकु राजा होते हुए भी कर्मों से चांडाल बन गए थे |

#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
11-विश्वामित्र के पुत्रों ने शूद्र वर्ण अपनाया | विश्वामित्र स्वयं क्षत्रिय थे परन्तु बाद उन्होंने ब्राह्मणत्व को प्राप्त किया |

12- विदुर दासी पुत्र थे | तथापि वे ब्राह्मण हुए और उन्होंने हस्तिनापुर साम्राज्य का मंत्री पद सुशोभित किया ।

#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
13-वेदों में अति परिश्रमी कठिन कार्य करने वाले को शूद्र कहा है (“तपसे शूद्रम”-यजु .३०.५), और इसीलिए पुरुष सूक्त शूद्र को सम्पूर्ण मानव समाज का आधार स्तंभ कहता है |
#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है
कहने का सार ये है कि किसी भी किताब पर आरोप लगाने से पहले उसकी सत्यता को परख लें और सन्दर्भ ग्रहण करें कि क्या वो चीज किस दृष्टिकोण से कही जा रही।
गधों ने कोई ग्रन्थ पढा नहीं और चलें हैं बकैती करने।
#मनुस्मृति_सर्वश्रेष्ठ_है

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25 Dec
सभी सनातनियों को #गीता_जयंती की हार्दिक बधाइयां,
आइये जानते हैं गीता के बारे में,
गीता दुनिया का सबसे बड़ा मॉटिवेशन ग्रन्थ है जिसमें किसी भगवान के मेसेन्जर ने नहीं अपितु स्वयं श्री कृष्णा ने ज्ञान दिया था।
18 अध्याय के 700 श्लोकों से अर्जुन का पूरा कायापलट ही कर दिया श्री हरि ने।
गीतोपदेश के पहले अर्जुन की स्थिति ये थी कि वो युद्ध क्या गांडीव उठाने के लायक न था और गीतोपदेश के बाद न केवल उसने गांडीव उठाया अपितु युद्ध को जीता भी।
गीता यूं तो महाभारत का ही एक अंश है परन्तु गीता को महाभारत से अलग "श्री अंगपाद" जी ने किया था।
#गीता_जयंती
#GitaJayanti2020
गीता की शुरूआत धृतराष्ट्र से होती है जहां धृतराष्ट्र संजय से पूछते हैं।
ॐ धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय
गीता में धृतराष्ट्र केवल एक बार ही बोले हैं और वो पहला श्लोक ही है जिसमें धृतराष्ट्र बोले हैं।
#GitaJayanti2020
#गीता_जयंती
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20 Dec
भारतीय एवम् सनातन संस्कृति का आधार वेद है,
अत: किसी भी अन्य ग्रन्थ को पढने से पहले वेदों को पढा जाना ही उचित है,
प्रस्तुत थ्रेड में महिलाओं का वेदों में क्या स्थान है उस पर एक नजर देखते हैं,

१- यजुर्वेद २०.९

स्त्री और पुरुष दोनों को शासक चुने जाने का समान अधिकार है |
२- यजुर्वेद १७.४५

स्त्रियों की भी सेना हो | स्त्रियों को युद्ध में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें |

३- यजुर्वेद १०.२६

शासकों की स्त्रियां अन्यों को राजनीति की शिक्षा दें | जैसे राजा, लोगों का न्याय करते हैं वैसे ही रानी भी न्याय करने वाली हों |
४- अथर्ववेद ११.५.१८

इस मंत्र में कन्याओं के लिए भी ब्रह्मचर्य और विद्या ग्रहण करने के बाद ही विवाह करने के लिए कहा गया है | यह सूक्त लड़कों के समान ही कन्याओं की शिक्षा को भी विशेष महत्त्व देता है |
कन्याएं ब्रह्मचर्य के सेवन से पूर्ण विदुषी और युवती होकर ही विवाह करें
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28 Nov
"United against hate" by the name one thing in your mind comes what a good name we should support it anyhow and be in the ideology of it.
Same is with left ecosystem they keep their name to decieve the innocent people.
tfipost.com/2020/11/united…
Similarly a group name was "Pinja tod gang" looks like it is talking about freedom but which freedom?
Freedom to disturb the India?
Freedom to deceive the innocent people?
Freedom to abuse one religion and appease another?
Similarly leftist ecosystem works.
After shaheenbagh these groups have joined the farmer agitation in delhi to convert it into a riot and to deceive again the innocent people of india.
As in anti caa movement there is nothing to do with the actual people of India similarly in new Farm bill there is nothing wrong.
Read 8 tweets
3 Nov
How sanatan dharma tells you about dimension,
So far we have studied x direction,
Y direction and z direction
1st - Up & down
2nd Right and left
3rd Forward backward.
@Real_Vishal_
@DetheEsha
@chitranayal09
@deshmata
@anshula
@Anshulspiritual
@LostTemple7
The fourth direction is Time and in this direction we can follow the third dension only half means we can go only in forward direction not in backward direction.
@Dharma_Chant
@punarutthana
@saySaffron
@_shwetanshi
@dharmicverangna
@ShefVaidya
@davidfrawleyved
But now if we study our vedas we will find 4 dimensional world where life exists.
These are
Satya loka
Tapa loka
Jana loka
Mahar loka
Svar loka
Bhuvar loka
Bhu loka
Atala loka
Vital loka
Sutal loka
Talatal loka
Mahatal loka
Rasatal loka
Patal loka
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1 Nov
Do you know about hanging temple?
आन्ध्र प्रदेश का लेपाक्षी मन्दिर
ये 70 खम्बों पर आधारित मन्दिर है जिसके 69 पिलर तो जमीन को छूते हैं परन्तु एक खम्बा ऐसा है जो जमीन को नहीं छूता अर्थात् हवा में है।
@LostTemple7
@punarutthana
@Voice_Of_Dharma
@AjayPandey__
@VertigoWarrior Image
अब आप ये कहेंगे कि इसमें कौन सा आश्चर्य है मन्दिर का आधार बाकी के 69 पिलर पर होगा कुछ यही थ्योरी ब्रिटिश इन्जीनियर हैमिल्टन ने दी थी और उसने झूलते पिलर पर हथौड़े से काफी वार किये तो पता चला कि कुल 25 पिलर पर दरारें आ गयीं अर्थात् मन्दिर का आधार झूलता पिलर है।
@Real_Vishal_ Image
इस मन्दिर का निर्माण 1583 में हुआ था यहां एक स्वयंभू शिवलिंग भी है जिसे वीरभद्रावतार माना जाता है मन्दिर का निर्माण विरूपन्ना और वीरन्ना नामक दो भाइयों ने कराया था जो कि विजयनगर राज्य में कार्य करते थे।
@Brand_Netan Image
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30 Oct
रानी गाइदिन्ल्यू कितने लोग जानते हैं इनको?
शायद नागालैंड के लोगों या मणिपुर के लोगों को छोड़कर एक भी नहीं।
इनका जन्म 26 जनवरी 1915 को नंग्कओ ग्राम,रंगमई,मणिपुर में हुआ था।
इनके पिता कोबाई कबीले के नागाई की पुरोहिताई करते थे।

@Real_Vishal_
@Brand_Netan
@DetheEsha
@ekhivillain
13 साल की उम्र में ये अपने चचेरे भाई के साथ हेरा आन्दोलन में जुड़ीं थीं जो कि मिशनरियोॆ के खिलाफ धर्म परिवर्तन को लेकर था।
29/08/1931 को जदोनांग को अंग्रेजों ने फां//सी दे दी।
फिर नागालैंड की दसवीं कक्षा में पढने वाली इस रानी ने आन्दोलन की बागडोर अपने हाथ में संभाली +
अंग्रेजों ने वहां गांव के गांव ज///ला दिये परन्तु आदिवासियों का विश्वास न डगा सके।
गोरिल्ला युद्ध की तकनीक जानने के चलते स्थान बदलकर काफी युद्ध किये रानी किला बनाना चाहती थी जिसमें 4000 सैनिक एकसाथ रह सकें परन्तु काम बीच में चलते ही अंग्रेजों ने युद्ध कर दिया +
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