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प्रेमी और सन्यासी क्रांतिकारी सीताराम राजू
अल्लूरी सीताराम राजू आंध्र प्रदेश में #रम्पा विद्रोह (1922-24) के #नायक थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के मद्रास वन अधिनियम (1882) जिसमें #आदिवासियों का #शोषण हो रहा था, के विरोध में सशस्त्र गतिविधियों को संचालित किया था। उन्होंने
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आदिवासियों और किसानों को से एकजुट करते हुए पूर्वी #गोदावरी और #विशाखापत्तनम (अब अल्लुरी सीताराम राजू जिले का हिस्सा) और #मद्रास प्रेसीडेंसी के हिस्सों में ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ छापामार अभियान चलाया था। उनके वीरतापूर्ण कारनामों के लिए उन्हें 'मन्यम वीरुडु' अर्थात जंगल
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का नायक कहा जाता था। उनके छापामार शैली की एक बानगी यह थी कि वे ब्रिटिश पुलिस स्टेशन या शस्त्र केंद्रों पर हमले के बाद वहां पत्र छोड़ा करते थे जिसमें उस स्टेशन से लूट का विवरण रहता था साथ ही वे अपने अगले हमले की तारीख और समय भी बताते थे जो चुनौती रहती थी कि ब्रिटिश पुलिस में
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गांधी और भगत सिंह लोग बोलते हैं गांधी भगत सिंह के खिलाफ थे , उनके शहादत की इज्जत नहीं करते थे । उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं किया । ये बहुत ही धूर्तता के साथ गढ़ा गया झूठ है ताकि वैचारिक स्तर पर एक धुंध बनी रहे और इसका फायदा साम्प्रदायिक ताकतें उठा सकें ।

#गांधी #भगतसिंह

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गांधी भगत सिंह के विचारों से इत्तेफाक जरूर नहीं रखते थे , लेकिन वे भगतसिंह और उनके साथियों के साहस की सराहना हमेशा ही करते रहे । 26/3/31 को कराची में प्रेस के लोगों को संबोधित करते हुए वे कहते हैं 'आत्म-दमन और कायरता से भरे दब्बूपने वाले इस देश में हमें इतना अधिक साहस और .. 2/11
और बलिदान नहीं मिल सकता. भगत सिंह के साहस और बलिदान के सामने मस्तक नत हो जाता है ।' गांधी अपने जीवन के हर आयाम में अहिंसक होने की कोशिश करते थे । वे भगत सिंह ही क्यों , किसी भी व्यक्ति को मृत्युदंड दिए जाने के सख्त विरोधी थे । वे मानते थे ये प्रकृति के नियमों के विपरीत है । 3/11
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#RSS, संस्था कैसे व क्यों बनी..?
#खिलाफ़त_आंदोलन की सच्चाई
काँग्रेस_के_कुकर्म😠😡😨😱
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आखिर RSS की स्थापना क्यों हुई.?
बड़ी मेहनत व इतिहास को छान छानकर सच्चाई सामने आती है.. अतः आप सभी राष्ट्रवादियों एवं सनातनियों से
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विनती है कि कृप्या अपना व अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए ऐसी पोस्ट को सँकल्प के साथ अधिक से अधिक ग्रुपों में शेयर/फारवर्ड करते रहें ।

धैर्य से पहले इस प्रश्न का पूरा उत्तर पढ़िए..औऱ जानिए कैसे गुरु गोविंद सिंह जी
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महाराज एवं साहिबजादों के मुग़ल हत्यारोंके वंशजों की कौम के बढ़ते अत्याचारों व आतंक के विरुद्ध भारत में यह आवश्यक था ।

संसद में मोदी जी ने हामिद मियां पर तंज कसते हुए कहा था कि आपके परिवार के लोगों ने खिलाफत आंदोलन में भाग लिया था,
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💥💥क्या #हिंदू होना गुनाह है?💥💥*

🔥देश के प्रथम राष्ट्रपति डा #राजेन्द्र प्रसाद के कहने पर भी नेहरू ने #राष्ट्पति भवन में मंदिर नही बनने दिया, लेकिन इंदिरा गांधी ने डा जाकिर हुसैन को #राष्ट्रपति बनाया तो तत्काल मस्जिद #बना दी। इस पर किसी ने प्रश्न नहीं उठाया?
भारत के राष्ट्रपति #जाकिर हुसैन हर जुम्मे की नमाज पढ़ने जाते थे। राष्ट्रपति फखरुद्दीन #अली अहमद जुम्मे की नमाज पढ़ने जाते थे। #उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी हर जुम्मे की नमाज #पढ़ने जाते थे तब किसी ने प्रश्न नहीं उठाया कि #क्या??
भारत के #राष्ट्रपतियों और उपराष्ट्रपति का नमाज पढ़ना उचित है?

🔥इंदिरा #गांधी ने ईद पर रोजा इफ्तार #पार्टी देने की शुरुआत की। धीरे-धीरे भारत में यह #फैशन बन गया। तब किसी ने इस पर #चिंता नहीं की कि क्या एक प्रधानमंत्री #द्वारा इफ्तार पार्टी देना उचित है?*
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गांधींनी दक्षिण अफ्रिकेतून आल्या आल्या अहमदाबाद येथील कोचरब इथे आश्रम स्थापन केला. त्या आश्रमात एक जोडपं अस्पृश्य जातीच होतं. म्हणून आश्रमातच नव्हे तर त्या संपूर्ण भागात खळबळ माजली. त्या जोडप्याला आश्रमात ठेवू नये, असा दबाव जेवढा आश्रमातून होता तेवढाच तो बाहेरुनही वाढला होता.

1/ कोचरब आश्रम
त्या जोडप्याला आश्रमाबाहेर काढलं नाही, तर आश्रमासाठी देण्यात येणारी आर्थिक मदत बंद केली जाईल, अशी धमकीही आश्रमाला आर्थिक मदत करणाऱ्याने गांधीना दिली होती. त्या आश्रमातील त्यांच्या जवळच्या नातेवाईकांनी सुद्धा या मुद्द्यावर आश्रम सोडण्याची तयारी केली होती.

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एवढेच नाही तर खुद्द कस्तुरबा देखील या दबावाला बळी पडल्या होत्या. त्याही जवळ जवळ आश्रम सोडण्याच्या मानसिकतेमध्ये आल्या होत्या. गांधी मात्र या प्रखर विरोधानंतरही कोणालाच बधले नाहीत.त्यांनी सर्वांनाच ठणकावून सांगितलं की, ‘ज्यांना आश्रम सोडून जायचं त्यांनी आश्रम सोडून जावं,

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